#ठेठ_पलामू:- लगन के सीजन
अप्रैल महीना में जइसहीं #खरवास खतम होवेला, त एगो नया सीजन स्टार्ट हो जाला। जेकरा '#लगन के सीजन' के नाम से जानल जाला। वइसे त साल भर बीच-बीच में शादी-बियाह के छिटपुट मुहुर्त आवत-जात रहेला । लेकिन सबसे जादे बियाह इहे 'लगन के सीजन' में होवेला।
बड़-बुजुर्ग का कहना है कि इ सीजन में खेत-खलिहान के काम पूरा हो जाला। सबके कोठी में अनाज भरल रहेला। बरसात अउर ठंडा में जादे लाम-लेफाफ के बेवस्था सबके बस के बात ना रहेला। सही बोलल जाओ त कम खर्चा में शादी-बियाह निपट जाला। सबसे बढ़िया बात कि इहे सीजन में सब लर-रिश्तेदार के पास बिजी होवे का केउ बहाना नहीं रहेला। काहे कि इ सीजन में सबके लइका-चेंगन के परीक्षा खतम हो जाला। भले देह जरे तक गर्मी हो लेकिन सबसे जादे मुहुर्त इहे सीजन में रहेला। एगो इहो फायदा रहेला कि इ समय में सब सामान एके जगह पर अउर सही रेट में मिल जाला।
बाजार में तर-तेवहार के बाद सबसे जादे भीड़ भी इहे सीजन में दिखाई पड़ ला। पैर रखे के जगह हो या नहीं.. ...लेकिन टेम्पो-बस अउर ट्रेन खचाखच भरल रहेला।अब भाई!आदमी के आना-जाना भी त जरुरी बा न। इहेला केतनो दिक्कत हो। पलामू के आदमी जीवट होवला। जेतना पसीना चुवे ओतने हँस-हँस के मजा लेवेला।अउर कहला कि अभी लगन का सीजन है तो तनी-मनी परशानी त होगा ही...।
हर गांव-घर में एक से बढ़के एक एक्सपर्ट कामगार आदमी रहला।अउ केकरा कहाँ बझावेला बा? होशियार आदमी सब जुगाड़ कर लेवलन। "सुन जी!कहाँ गढ़वा जात बड़ न?तनी ननका के भी लेले जइह साथे...। उनकर मौसी के इहाँ नेवता देवेला बा।" न बाबू!कल तनी आपन गाड़ी निकाल लेब त...! #डीजल भरवा देब।फलाना बाबू के लेके कल चल जइह छोटकी मइयां के #लितहर लेके साथे...अब बहिन-बेटी के लेवे जाएला बा..। इहे दिन ला न गाड़ी किनाइल बा। तब फलाना बाबू कहेगा कि न चाचा!इहो केउ कहे वाला बात बा।
अब केउ दूसरा आदमी को चढ़ाया जाएगा कि -"न जी! एतना रंगबाज बनलss। देख त उ टेंट हाऊस वाला जादे फुटानी बतियात बा। ओकरा बोलss न, तनी हिसाब से पइसा लगावे।" केउ हलवाई के सही रेट में फिक्स करे में #एक्सपर्ट रहला त केउ किराना समान खरीदे में उस्ताद..। इहे सीजन में सबके प्रतिभा के परीक्षा होवला।
सब हितजन के मिलन इहे सीजन में होवला। बड़-बुजुर्ग भी बढ खुश रहले। भले बाल उड़ गइल बा। दांत झर गइल बा।लेकिन इ लगन के सीजन में साली-सरहज सबसे भेंट हो जाला।अउर जवानी के मीठ याद फिर से ताजा करेके मौका मिल जाला। शादी-बियाह त दू चार दिन में निपट जाला।लेकिन आपन सुख-दुख में साथ देवे के पहचान इ लगन के सीजन में ही होवेला।
जेकरा इहाँ कार्यक्रम होवे वाला बा।ओकर खरिहान लिपा के चकाकक हो जाला। अगल-बगल के घर से खांटी-चौकी सब बेवस्था हो जाला। चाहे केतनो गर्मी हो।टप-टप पसीना चुवत रहे। आदमी काम में बाझल रहला। केकरो स्टेशन जाएला बा कि दिल्ली से भौजाई आवत बाड़िन। केउ मौसी के लेवे बस स्टैंड गइल बा। केकरो फुआ भोर के गाड़ी में आवत बड़िन त.. उ राते से रोड के पहरा करत बा। केउ पनीर लेवे गइल बा। त केउ तरकारी के बेवस्था में जुटल बा। इ 'लगन के सीजन' बा न...! त अभी केकरो पास टाइम नइखे।
अब वइसे जमाना बदल गइल बा। अब त प्री वेडिंग शुटिंग के प्लान पहिले बन जाला। मेंहदी, चूड़ी और फैशन डिजाइनर के बुकिंग के बाद #कोरियोग्राफर आवेला। घर में मौसा-मौसी, चाचा-चाची, फुआ-फुफा ही नाहीं, बाबा-आजी अउर नाना-नानी भी डांस सीख के बियाह में झुमें के तैयारी में भिड़ल रहले।आखिर आधुनिकता के समय में हम #पलामू के लोग भी किसी से कम थोड़े ही हैं।लगन के सीजन पर अउर लिखे के मन करत बा लेकिन संपादक महोदया पहिले चेता दी हैं कि पोस्ट का लिमिटेशन है लिखने का..।इसीलिए अंत में आप सभी को 'हैप्पी लगन का सीजन।'
©Kritika Pandey
7 Apr 2019, 11:53

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