पलामू में पर्यटन
भले यूट्यूब पर आपको मिलियन व्यू वाले वीडियो नहीं मिले, भले टूरिज्म वेबसाइट पर आकर्षक तस्वीरें दुर्लभ हो, पर हकीकत यह है कि प्रकृति ने पलामू को बस अकाल और भूखमरी की धरती नहीं बनाई है।
बड़ी मेहनत से उसने यहाँ पर जैव विविधता को समृद्ध किया है। यहाँ की धरती के गर्भ में बहुमूल्य खनिज संपदा के साथ विविध वनस्पति यहाँ के परिवेश को अतुलनीय बनाती है। जनजीवन की रंग बिरंगी झांकियाँ यहाँ की महत्वपूर्ण खूबी है। पर्यटन के लिहाज से विदेशी और पड़ोसी राज्यों के सैलानियों को पलामू की धरती सालों से रिझाती रही है। अक्सर साइकिल पर सवार पाश्चात्य देश के यात्री यहाँ पलामू मे विचरते दिख जाते थे।
मगर फिर यहाँ भी वही हुआ, जो कश्मीर के साथ हुआ था। सड़क टूटे, सुरक्षा बिखरी और बिखर गया पलामू का सौंदर्यबोध, विलुप्त होने लगा नयनाभिराम दृश्यों का मोहपाश। बंजर धरती और वृष्टि छाया के अभिशाप को झेलना पलामू के नसीब में तो था ही, मगर उसके साथ भय, अविश्वास और मौलिक सुविधाओं की कमी ने पलामू के पर्यटन उद्योग को निचले पायदान पर धकेल दिया।
असीम संभावना है यहाँ पर पर्यटन की। सैकड़ों जल प्रपात हैं कोयल, औरंगा, अमानत, मइला आदि नदियों के। महुआ, साल, पलाश, सिरीस, कचनार आदि वृक्षों से ढंके पठार और ऊंची चोटियों से इनका भव्य अवलोकन स्थल किसी भी सैलानी को कैमरा खोलने के लिए मजबूर कर देता है।
ऐतिहासिक धरोहरों की बात करें तो 15वीं शताब्दी या उससे पहले की वास्तु स्थापत्य के सुदृढ़ उदाहरण किले और हवेलियां, व्यापारिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु सामाजिक विभाजन के मानकों पर खरे उतरते गाँवों का स्वरूप, मगही और सादरी के शब्दों में आदिवासी उतार चढाव का लेप लिए कोस-कोस भर मे बदलती बोलियाँ और उतनी ही मीठी लोकगीतों की समृद्ध परंपरा, प्रकृति के साथ सहअस्तित्व के उदाहरण लिए गाँवों के रीति-रिवाज और सदियों से अभाव में भी जीवन रस को स्वादिष्ट बनाती मिठाइयों और पकवानों की लंबी फेहरिस्त।
अब भला कौन सा ऐसा गाँव होगा जहाँ कजरी-झूमर का संग, दूधी माटी का रंग, बीर कुँवर- तीज- जीतिया- गोधन का उमंग और लकठो- पूसहा का विलक्षण ढंग नहीं दिखता हो।
ठेठ पलामू के माध्यम से अब हम बात करेंगे पलामू के विभिन्न #स्थापित और #सम्भावित पर्यटन स्थलों के बारे में। आने वाली कुछ कड़ियों का स्वागत करिए, अपने विचार व्यक्त करिए और हमारे अभियान का हर तरह से हिस्सा बनिए।
परिकल्पना: सत्यान्वेषी स्वामी
आलेख: सन्नी शुक्ला
संपादन: अजय शुक्ल
फोटोग्राफी: सुधांशु रंजन
16 Dec 2020, 07:48
No comments:
Post a Comment