चल गोय चल सब जाईत हथु। कहाँ? अरे!उहे दूधी माटी ला। दूधी माटी!के के जाईत हऊ? अरे! गाँव के सब जाईत हथु। अच्छा! का से जइबे #हिंठ के कि साईकिल से। अरे!बुड़बक हे का साईकिल उँहा तक ना जतऊ, जंगल में जायेला हऊ, हिंठिये के जाए पड़तऊ जल्दी कर न तो सब आगे निकल जईतथू, हमनी पिछुवा जइबे। अब जल्दी से कोड़नी आऊ बोरा लेके आव। हाँ, गोय आवईत हियऊ। अच्छा, ई बताव #दीवाली आ गेलऊ का कि सब दूधी माटी लावे जाईत हथु। हाँ रे! तीने-चार दिन बाकी हऊ दीवाली में, हाँ गोय तबे हमरो माई रोज-रोज सुनावईत हलऊ की झोरे-पोते खातिर पता नई कब दूधी माटी आई हमरा घरे।
हमनी के गाँव के दीवाली के मतलब कुछ अलग ही होवत रहे शहर के चम- चमाईत इलेक्ट्रिक लाईट बत्ती अऊर पटाखा के शोर-शराबा से बिल्कुल अलग बिल्कुल शुद्ध साफ-सफाई और दीया के रोशनी के त्योहार आऊ ओकर तैयारी दशहरा बीते के बाद से शुरू हो जा हलक । गाँव में लगभग सबके घर माटी के होव हलक तो ओकर साफ-सफाई में काफी समय लाग हलक और साथे-साथे धान के कटनी , #दंवनी/दऊरी(दंवाही) और #ओसाई के काम के भीड़ भी रह हलक जेकरा में से समय निकाल के साँझ-सबेरे आऊ रात-बिरात माई चाची, फुआ, दादी लोग घर-अँगना, ढाबा/ओसरा, छत, ओटा सब के #लेवार_लीप के तईयार करतन ओकर बाद बारी अईतक दिवालन के झोराई-पोताई के काम के।
ओकरे खातिर पोताई ला चूना जईसन माटी जंगल में मिलत रहे जेकरा #दूधी_माटी कह हलन ओकरा सब लाव हलन, आज के जईसन पक्का मकान न रहे जेकरा पेंट पोचाड़ा कईल जाव। दीवाली के ठीक एक-दो दिन पहिले तक सब के घर लिपा-पोता के एकदम चमके लागत रहे। धनतेरस के दिन तक हमनी कुम्हार घर जाके माटी के दीया और सरसों या तिल के गोठन दे के सरसों तेल ले आवत रही। दीवाली के एक दिन पहिले आज सब जेकरा छोटका दीवाली बोल हत ऊ दिन दादी पिछला साल के एगो पुरान दिया में तेल भरके सबके सुतला पर घर से दूर जाके ओकरा जला के चुप-चाप वापस मुड़के घर आ जा हलक जेकरा जमदिया/#जमदियरी कह हलन ,दादी बोलतक कि ई जमदिया हन एकरा केहू के न देखे के चाही।
अब अईतक दीवाली .....ई दिन हमनी अपन घर के सब #माल_मवेशी (गाय-बैल) के कोई अहरा या नदी में ले जाके खूब नहउति और घरे लाके ओहनी के सींग में घीव लगा के चमचमा देव हली ओहनी के सींग के। दादी कहतक कि आज एहनिये के पूजा/त्योहार बा लक्ष्मी होखेलन ई सब। ओह समय के परिप्रेक्ष्य में आज सोचिला तो दादी के कहल सहिये लागेला काहेकि ऊ समय पशुधन ही तो बड़ा धन/लक्ष्मी रहे।
अबतक दीवाली के शाम हो गेलक मिट्टी के दीया के धो के ओकरा पूजा खातिर रखे जाये लागल ,जउन पूजा वाला दीया रहे ऊ में घीव भराईल आऊ बाती लागल बाकी में सरसों तेल भरके चौकी पर रखल गेल। अब इन्तजार होवे लागल बेर डूबे के कि जल्दी जल्दी लक्ष्मी पूजा होवे, घर में कूल देवता के पूजा होखो उँहा दीया जले ताकि हमनी मन्दिर, मण्डप में दीया जरावे जाऊँ, ई सब जगह दीया जरे के बाद अपन दीवाली शुरू होइतक घर के हाता/चाहरदीवारी ,#ओटा_पाखा और छप्पर पर लाईन से दीया और मोमबत्ती रखती और ओकर अलावे #खरिहान, गोहाल में भी दीया जलावल जाईत कुछ ही समय मे पूरा गाँव दीया मोमबत्ती के झिलमिल रोशनी से जगमगा जाईत और हमनी ऊ रोशनी के खुशी में डुबकी लगावे लगती साथ ही उहे बीच मे देखइत रहती की केकर घर के दीया जल्दी बुझाईल मतलब समझ जईती कि ऊ गरीब आदमी बा हमनी सब के दीया बुझा जाईत खाली अपन गाँव के गुरूजी लोग के घर के दीया काफी देर तक जलत रहे।
हमनी के दीया दीवाली के बीच में माई, दादी, चाची, फुआ लोग अलग बिजी रह हलन ऊ हलक खाना बनावे के काम काहे कि दीवाली के दिन हमनी के गाँव मे एक विशेष प्रकार के खाना बनेला जेकरा शायद पूरा पलामू में #पीठा(अरवा चावल के पीस के ओकरा #चाँड़ के और उरीद के दाल के सिलवट में पीस के मसाला (अदरक,लहसुन, हींग) मिलाके, चाँड़ल आँटा के खोरुआँ बना के ओहमें पीसल मसाला वाला उरीद डाल भरके भाप में पका वल जाला) कहल जाला बनावे में लागल हलन , ई बड़ा मेहनत वाला भोजन बा दीवाली मे उहे पीठा आऊ घीव और ओल के सब्जी बनेला और बड़ा स्वादिष्ट होला। हमनी पीठा खा के सुतली, पर नींद कहाँ आवत रहे दिमाग में तो दीया बटोरे/जमा करे के बात चलत रहे। अब जल्दी भोरहिं उठ के हमनी दीया चुने मंदिर, मण्डप, खरिहान में भगली काहे कि बिहाने सब लईकन के बीच कम्पटीशन होइतक कि केकरा भीर केतना दीया बा मानो उ अपन रईश होखे के सिम्बल रहे। आऊ उहे भोर में दादी टूटल सूप- बढ़नी लेके हँसुआ से सउँसे घर में पीटते अन्हरिये में निकलतक आऊ ओकरा घर से दूर बाढ़न फेंके वाला जगह पर फेंक अई तक पूछती कि का करईत हे दादी कह तक साल भर ला दुःख-दरीदर भगा दिहलीं।
अबतक सुबह हो जईतक आऊ अब एक स्पेशल इवेन्ट होईत जे हलक #सोहराई गायन आऊ नाच ई उनका द्वारा होव हलक जे हमनी के गाय साल भर जंगल में ले जाके चरावत रहे हमनी के महतो जी, उ ढोल वाला के लेके गाँव में अईतन और घर के छोट छोट बच्चा के गोदी में लेके खूब नाच गा के सोहराई मनईतन , हमनी लईकन के उनकर नाचब गाईब खूब मजा देत रहे, नाच-गा के सब घर से अपन पऊनी लेतन अऊर जउन घर मे गाय गिरउले रहतक उँहा से विशेष पऊनी साड़ी/धोती पक्का ले के जइतन।
एकर बाद दीवाली अब अपन आखरी चरण में बा सब लईकन अपन अपन चुनल दीया के खोरी (गाँव के कच्ची गली) में प्रदर्शनी लगइति अऊर देखल जाईत कि केकरा भीरा सबसे जादा आउ बड़े-बड़े दिया बा, फिर उ दिया में #काँटी से छेद करके सुतरि और सोनाठी से तराजू बनावल जाईत आऊ ऊ तराजू में धूर (धूल) भरके खूब दुकानदार आऊ ग्राहक बनल जाईत, ई तरह से अपन गाँव के दीवाली के समापन हो जा हलक कि अगला साल हम रात के बारहे बजे उठ के ज्यादा से ज्यादा दीया चुनब।
©Rakesh Bharti Goswami
लेखक सेना में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और फ़िलहाल जम्मू कश्मीर में तैनात हैं। एक फ़ौजी की ओर से #ठेठ_पलामू के माध्यम से सभी पलामू वासियों को दिवाली की हार्दिक बधाई।
7 Nov 2018, 15:22

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