Sunday, February 21, 2021

पलामू में पिकनिक





ई कोरोना ड्यूटी के चक्कर मे साल भर बाद बड़ी मुश्किल से भैया को एक सप्ताह की छुट्टी मिली थी। अब मान लीजिए कि दो-दिन तो आने-जाने में ही खर्चा होने वाला था। अब घरे जाने के बाद 'का करे का ना करे' वाली स्थिति में थे।

हमलोग पहले बंगाली या विदेशी लोग को देखते थे कि पूरा परिवार पिकनिक मनाने निकला हुआ है, तो देख के बड़ी जलन होता था। चुकी पलामू खेती किसानी का एरिया है, और थोड़ा लाज लिहाज भी ज्यादा ही रहता है परिवार में, तो फॅमिली गेट-टूगेदर जैसा फैन्सी आयोजन तो नामुमकिन ही था। ले दे कर 'मंदिर में पूजा यानि तीर्थयात्रा' और 'शादी-बियाह' छोड़ के और किसी अवसर पर फुल फॅमिली टूर शायद ही ईधर किसी घर मे होता हो।

तो हमलोग भी सोचे कि इस बार फॅमिली को ले चलते हैं है पिकनिक पर। कहाँ? ज्यादा दूर भी नहीं! काहे कि गाँव का घर ऐसा नहीं होता है कि बंद कर के दो दिन बाहर रह लीजिए। गाय गरू, खेती खलिहानी सब कुछ देखना पड़ता है न। बियाह शादी में तो एकात बेकत घर देखे रुक जाता है पारा पारी, लेकिन पिकनिक में केकरो छोड़ कर जाना ठीक नहीं लगता। तो मने मन प्लानिंग बनाए कि एक दिन का कार्यक्रम रखा जाए। सब लोग घर से दूर जंगल में कहीं जाएं।

लंबा- चौड़ा संयुक्त परिवार। 30-35 लोग। अब लेडीज लोग को खाना बनाने से मुक्ति देने के लिए लड़कों के गैंग ने खाने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। रेडीमेड खानों का भी आइटम रखा गया। काहे कि लड़कों के चूल्हा से जरूरी नहीं कि स्वादिष्ट भोजन ही मिले। अब खर्चा का इंतजाम सब भाई बहन लोग जो बाहर बाहर कमाता है उस से चंदा कर लिया गया।

गाड़ी का इंतजाम कइसे हो? "कमसे कम चार बोलेरो में तो हो जाएगा" - छोटा भाई बोला। तब तक नन्हकी बोली कि- "पीछे वाला डिक्की मे के बैठेगा उल्टी करते-करते हालत ख़राब हो जायेगा। और ऊपर से उसका सीसा भी नहीं खुलता है"। तब जा कर बात बना कि स्कूल बस किया जाये, काहे कि कहीं रोक टोक भी नहीं होगा और दूसरा बात नॉर्मल बस तो लगन के बुकिंग में सब बिजी था तो मिलता भी नहीं।

अब दिक्कत नम्बर तीन कि बाबा को कैसे मनाया जाए? काहे कि खानदान के पहिला सामुहिक पिकनिक का बात था। लाज- लिहाज वाला माहौल आप समझ ही गए होंगे अब तक। हिम्मत कर के छोटका भाई बाबा से पूछने गया 'मोबाइल मे गेम खेलने मिलेगा' के इनाम पर। सब डर के मारे इंतजार में कि क्या फरमान आया। जा सार के! पता चला कि नेटरहाट घुमे के मन बहुत टाईम से था उनको। तो चुपचाप उनसे पिकनिक के प्लान के साथ कहा गया कि कल नेटरहाट चलना है सब के साथ घूमने के लिए। अब बाबा भी कोरोना के चक्कर मे कहीं गए नही थे तुरंत तैयार हो गए।

रास्ता के लिए कुरकुरे चिप्स लेमनचुस सब रखा गया। अब रास्ता में शांत कइसे रहा जाए पर उससे बड़ा दिक्कत की हल्ला कइसे किया जाए। तब छोटका चाचा सबसे पहिले जयकारी से शुरुआत किये और उसी बहाने लगभग पूरा पलामू प्रमंडल के जेतना देवी देवता से लेकर सबके नइहर ससुरा तक का जयकारी मना। उसके बाद अब अंताक्षरी खेलना था तो डरते डरते दु चार भजन से शुरू हुआ और फिर 90 के दशक के गानों से होते हुए अपने औक़ात पर आ गया। मिला जूला कर माहौल एकदम हरा भरा था।

सब के पास मोबाईल सो सब आपन आपन फोटो खिंचा। फॅमिली ग्रुप मे फोटो के बाढ़ आ गया। भौजी के फोटो सबसे ज्यादा। स्टैटस अपडेट मे तो कोंच-कोंच के दर्जन से कम फोटो कहीं नहीं। नया देवर तो वीडियो बना बना के पोस्ट कर रहे हैं। इतना मजा आया... जो चाचा चाची सबसे गंभीर थे ऊ लोग भी मैग्नोलिया पॉइंट पे फोटो खिंचा रहे थे हंसी ठिठोली के साथ। जो बेटा पापा के डर से शाम होते किताब ले के बैठ जाता था, आज पापा मम्मी को पोज दिलवा के फोटोग्राफी कला दिखा रहा था ।

हम तो हर बार की तरह इस फैमिली फ़ंक्शन में भी नदारद थे। व्हाट्सएप से ही शामिल थे। लेकिन जब सब को मस्ती करते देखे तो सँयुक्त परिवार का फिर से महत्व पता चला। कसम से रोआइन रोआइन जीव हो गया।

आप लोग से भी अनुरोध है कि फॅमिली पिकनिक का आयोजन करिए और परिवार के नजदीक जाइए। यही स्वर्ग है, यही ख़ज़ाना है।

एक और अनुरोध रहेगा! कृपया प्लास्टिक के खाओ-फेंको प्लेट और गिलास ये सब मत प्रयोग करिए।जितना हो सके हरे-भरे पतियों से बने पत्तल-दोना का उपयोग कर के देखिए। फिर प्रकृति का आनंद, प्रदूषण से मुक्ति और स्थानीय लोगों का रोजगार सब कुछ देखने मिलेगा।

© आनंद केशव 'देहाती'
30 Dec 2020, 12:20

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