कल बेतला में जानवरों की संसद ने आपातकाल बैठक बुलाई, जिसमें सभी जंगल के जानवर पहुँचे थे। प्रेम नाम का जंगली भैंसा जो बेतला की शान है। लता नाम की हिरणी जो बेतला की आकर्षण है। बंकू नाम का बंदर और ढेर सारे जानवर उस बैठक में उपस्थित थें।
परन्तु बेतला का राजा खेलावन सिंह, जिसके नाम पर इस स्थान का नाम बेतला टाइगर रिजर्व रखा गया है। वो कई सालों से किसी भी बैठक में उपस्थित नहीं हो रहे थे और तो और कई सालों से उन्हें और उनके परिजनों को यहाँ पर न तो किसी ने देखा है और न ही उनकी कोई खबर ही मिल पा रही है।
उड़ती खबर तो यह मिली है कि या तो निर्दयी शिकारियों ने उन्हें और उनके परिजनों को मार दिया है या फिर वो पलामू की गौरवशाली संस्कृति का अनुसरण करते हुए यहाँ से पलायन कर चुके हैं। परन्तु अभी तक कोई पुष्ट समाचार नहीं मिली है कि वह अपने परिजनों के साथ कहाँ हैं?
तमाम बेतला के जानवरों को अपने राजा की अनुपस्थिति में कुछ दिनों पहले यह खबर मिली है कि बेतला पार्क के बगल में डैम का निर्माण होने वाला है। जिससे इन्हें खतरा सता रहा है कि धीरे-धीरे छोटा हो रहा इनका निवास स्थान जंगल अब और छोटा हो जाएगा।
डैम के निर्माण के लिए उनसे कोई अनुमति नहीं ली गयी है और न ही इन्हें किसी प्रकार का मुआवजा वितरण किया गया है।इनकी मदद करने के लिए पलामू के तमाम पर्यावरणविद भी खामोश हैं। सीमित संसाधनों के कारण उनकी आवाज मेघा पाटेकर और राजेन्द्र सिंह तक पहुँच सके, यह भी मुश्किल है।इस समय सभी नेता लोग चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हैं। यह बात अलग है कि चुनाव जीतने या हारने के बाद भी वह दूसरे हरामखोरी वाले कार्य में व्यस्त हो जाएँगे।
प्रेम भैंसा तो गुस्से में कह रहा है कि अब तो हमारे शिकार होने का खतरा और बढ़ जाएगा। वैसे यहाँ सबसे ज्यादा डर साँपों को है। थोड़ा भी बाहर क्या निकलते हैं, उनका तो फन ही कुचल दिया जाता है। खैर हादसे तो सबके साथ होते ही हैं। लेकिन आज बेचारी लता हिरणी भी रो रोकर कह रही है कि झुम्मन नाम का शिकारी और उसका गैंग लगातार उनका शिकार कर रहा है।
खेलावन सिंह की अनुपस्थिति में जंगल की रक्षा करने की जिम्मेदारी गजराज दल के नेता गजेश जी की थी। किन्तु वे यहाँ की अव्यवस्था और खतरे को भांपकर पलायन करने के चक्कर में रेल गाड़ी में फंसकर पहले ही मर चुके हैं और अब डर के मारे उनके गजराज हाथी दल के सदस्य कम ही बाहर निकलते हैं।
जंगल लगातार छोटा होता जा रहा है। अब बिना नेतृत्व के यहाँ के निवासी भयभीत हैं कि नया डैम बनने के बाद तो उनका बसेरा ही लूट ही जाएगा। एक तो वह बाहरी आमद और गाड़ियों के बढ़ते आवागमन के प्रदूषण से त्रस्त हैं। जिससे यहाँ जानवरों में बीमारी भी फ़ैल रही है। दूसरी बात की ,गर्मी का मौसम भी आ चुका है। परेशानियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। क्या करें,क्या न करें? कुछ समझ में नहीं आ रहा है। तब बंकू बंदर ने सलाह दी कि आज की कार्यवाही और अपनी परेशानियों को आप #ठेठ पलामू में लिख कर भेज दो। पलामू के बुद्धिजीवी वर्ग के बहुत सारे लोग इस पेज से जुड़े हुए हैं। वे जरूर हमारी परेशानी को समझेंगे और कोई न कोई रास्ता जरूर निकालेंगे।
तो बेतला जंगल के संसद की कार्यवाही का संपूर्ण विवरण आज आपके सम्मुख ज्यों का त्यों प्रस्तुत कर दिया गया गया है। अब उन बेबस जानवरों के दुख पर आप ही कोई समाधान निकालें। उन्हें आप पर और सिर्फ आप पर पूरी उम्मीद है।
© Sunny Shukla
14 Mar 2019, 06:36

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