पत्रकार प्रभात मिश्रा के शब्दों में कहें तो पलामू शौर्य और सौन्दर्य की धरती है. वनस्पति शास्त्री गुप्ता जी की मानें तो चकवड को साग, कोदो को भात, पेंहटा को कचरी बनाना पलामुवासियों की प्रबल जिजीविषा का सूचक है. यह दर्शाता है कि हम कैसे अकाल और अभाव में भी अवसर खोज निकालते हैं.
आज बात शौर्य की. देशभक्ति की बात हो और पलामू उसमे पीछे छुट जाए, संभव नहीं. आइये दिखाते हैं हम आपको ...
नावा बाजार के रजहरा कोठी स्थित 150 वर्ष पुराना बरगद का पेड़, 1857 में हुए प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई का गवाह, जहाँ 27, 28 व 29 नवंबर को अंग्रेजों के द्वारा सैकड़ो आंदोलन कारी ब्राह्मण फाँसी पर झुले. विस्तृत जानकारी के लिए इतिहासकार डा. बी विरोतम को पढ़ सकते हैं. आज़ादी की लड़ाई में शामिल यदु बाबु, गणेश बाबु, पूरन चंद, अमिय घोष, जगनारायण पाठक इत्यादि सेनानियों के बारे में विस्तार पूर्वक आप प्रभात मिश्रा के फेसबुक लेखों में पढ़ सकते हैं, हालाँकि उनके ये लेख हम समय समय पर ठेठ पलामू पर भी प्रकाशित करते आये हैं. उम्मीद है उनके ये आलेख जल्द ही पुस्तक के रूप में आपके सामने होंगे.
एक और बात गौर करने लायक है, आज के ही दिन देश को एक संविधान के साथ गणतंत्र घोषित किया गया था. हमारे लिए गर्व की बात है कि पहले संविधान सभा में पलामू के अमिय घोष और यदु बाबु शामिल थे. उनके हस्ताक्षर अभी भी संविधान की पहली प्रति में विराजमान हैं.
कारगील युद्ध में 23 जून 1999 को वीरगति प्राप्त युगम्बर दीक्षित को हम कैसे भूल सकते हैं. भदुमा गांव के रहने वाले युगाम्बर जी की शादी मात्र दो साल पहले यानि 1997 में उषा दीक्षित से हुई थी. उनके बेटे युद्धजय भी सेना में जाना चाहते हैं. 06 सितम्बर 1999 को पलामू के तुकबेरा निवासी प्रबोध कुमार महतो भी पाकिस्मानी गोली से शहीद हो गये थे. पोलपोल गाँव में कारगील शहीद स्मारक में इनकी यादें और बहादुरी के किस्से संजोये गए हैं. यहीं दोनों परिवारों को जमीन भी उपलब्ध कराये गए हैं.
क्षेत्रीय अपराधों की रोकथाम और हमारी सुरक्षा करते हुए पुलिस कर्मी के रूप में भी हमने पलामू के कई बेटों को खोया है. श्याम सुन्दर प्रसाद, संजय शर्मा, सुरेन्द्र यादव, विजयानंद सिंह, बालकिशुन उरांव, पैकास मिंज, मसीह भूषण लकड़ा आदि दर्जनों नाम हैं, इनके बारे में विस्तृत जानकारी झारखण्ड पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध है, लिंक कमेंट बॉक्स में डाला गया है.
आज सिर्फ शहीदों को ही नहीं, बल्कि अपने अपने क्षेत्र में देश सेवा कर रहे हर पलामू वासी को ठेठ पलामू की तरफ से सलाम है.
आज विशेष रूप से हमने याद किया है ठेठ पलामू की कोर टीम में शामिल एकमात्र फौजी #राकेश_भारती_गोस्वामी जी को. आप पेज की परिकल्पना के समय से ही हमारे साथ जुड़े हुए हैं और अपने व्यस्ततम जीवन के बावजूद सकारात्मक योगदान देते रहते हैं. इसीलिए आज पेज की तरफ से संजीव पाण्डेय और सन्नी शुक्ला के द्वारा उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया गया. इस तस्वीर के माध्यम से आज हम पलामू के सारे फौजियों को सलाम करते हैं, दिल से दुआ और धन्यवाद देते हैं. चित्र कचरवा डैम का है.
© सत्यान्वेषी स्वामी
26 Jan 2021, 12:25
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