Monday, May 21, 2018

गोई लगाईब का!

#ठेठ_पलामू : गोई लगाईब का!
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आजी खूब जोर जोर से बुलावत रहे.
"इहाँ सुन गे. गोई आइल बड़ी, तनी चाय ठंडा लान ता."
नास्ता बना के हम आजी और उनकर गोई के बगल में बैठ गइली. आउ पूछलि कि-"आजी इ बताव तोर गोई के का नाम हाउ."
आजी कहलक कि गोई के नाम नहीं धरल जाला.
हमरा बड़ी क्यूरोसिटी होईलख. हम हस के छेड़े वाला अंदाज में बोलली कि "गोई लगावे" के कुछ नियम काननों बा का आजी? तब आजी बतावे लागल - "पाहिले अगर केकरो से दोस्ती करे के मन होइतक त ओकरा से 'गोई' लगावल जात रहे. 'गोई' दो तरह के मेहरारू से लगावल जात रहे. अगर एगो मेहरारू सूंदर बा तो सुंदरे मेहरारू से गोई लागैतक. अगर केकरो २ गो रेंगा बा तो उ दूवेगो रेंगा वाला से गोई लगावत रहे. जेकर तीन गो बा उ तीन गो वाला से." हमरा ई सब जान के बड़ी मजा आइलाक़.
हम कहली आउ बताऊ न, आउ का करत रह तोहनी. जब दोनो मेहरारू इ डिसाइड कर लेतान कि गोइयारा करेला बा तो एक किलो चाउर आउ 5 भेलिया गुड़ आपने गोई के अंगना में रख के चल जइतन. पीछे मुडियो के नै देखतन. फिर कुछ दिन बाद पुवा पकवान बना के अपना घरे नेवता देतान. आउ नया लुगा फाटा पहिना के ओकरा बिदा करतन. फिन आजी इहो बतइलक की 'गोई' आउ 'गुरु' के एके दर्जा रहे. दोनों के नाम नहीं लेवल जाए, आउ न त उनकर बुराई बतियाइल जाये.
हमार फोन तब तक बाज गइल. उने से आवाज आइल "what’s up babe”.
हम कहली "all fine गोई ”.
हमर दोस्तवा हसे लागल. कहलक - "I think you should come out of palamu soon."
हम सोचली कि हमरा पास इतना “friend, buddy, babe, darling” भरल बड़ी. काश एगो "गोई" भी रहते हलन....
© swetaanand mishra

1 comment:

  1. पुरानी बातों में बहुत ही आनंद की अनुभूति होती है।ये सब अभी भी गांव में देखने को मिल जाता है लेकिन अब मायने बदलते जा रहे हैं।अब लोग हर चीज में लाभ खोज रहे हैं

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