Monday, February 6, 2023

" नोट्स शेयर कर रहे थे हमलोग "

वैलेंटाइन डे ना हो गया कउनो राष्ट्रीय पर्व हो गया! जिधर देखो अतिउत्साहित जवान प्रेमी-युगल एक साथ दिख रहे होते हैं, तो पता चलता है कि ओ ये भी एक्जिस्ट कर रहे थे, चलो अच्छा है मोबाइल की दुनिया से बाहर तो निकले सब मिलेनियल्स! और ख़ुशी तो देखो इनके चेहरे पर, किस बात की है भाई? इतनी ऊर्जा, जिंदगी सवांरने में लगा देते, तो क्या ही बात होती न, पर सिर्फ हवा-हवाई, आसमानी-सुल्तानी के इंतेजार में। ज़रा बोल दो इनको टूटी सड़क पर हो रही दुर्घटना और लोगों की तकलीफ के लिए एक आवेदन दे कर आ जाओ या फिर आवाज ही उठाओ, तो इनको थकान हो जाती है।

वैसे तो मुझे वैलेंटाइन डे की महिमा का ज्ञान कॉलेज तक नहीं था और ना ही सोशल मीडिया से इतनी जुड़ी थी कि इसपे रंगबिरंगे रील्स बनाकर ज्ञान दे पाती। कल शाम में पार्क में बेटी को घुमाने ले गयी थी, तो जिधर नज़र दौड़ाया बस प्यार की बारिश ही हो रही थी। एक दो प्रेमी-युगलों से पूछ-ताछ की, फिर पता चला सब जोड़े एक दूसरे के कजिन थे, जो बस साथ में नोट्स पढ़ने आये थे.!!
बिचारे देश की तरक्की के लिए पढ़ ही तो रहे थे, घर के आंगन में सूर्य की रौशनी आज ठीक से नहीं पहुंच पा रही थी ना, इसलिए बिचारे पार्क में ही कोई कोना ढूंढ लिए! तो और क्या ही करते! बताइए क्या गलती थी इनकी! गलती आँगन के डिज़ाइन की थी ! गलती मम्मी पापा की थी कि घर में पढ़ाई का माहौल नहीं रहने देते। कॉलेज में प्रोफेसर लोग नहीं पड़ने देते। प्रेमियों की पढ़ाई देख कर शाहरुख खान सर का गाना याद आ गया-
"किताबें बहुत सी पढ़ी होंगी तुमने,
मगर कोई चेहरा भी तुमने पढा है? "
मीडिया के गोदी हो जाने के बाद प्रोपगेंडा से बचने के लिए न्यूज अवॉयड करती हूं। ऐसे ही कुछ जो थोड़े न्यूज़ कानो में पड़ते हैं, उससे पता चलता है कि दुनिया कितनी तरक्की कर रही है। इनसब वीरों के होते हमें चाँद क्या, मंगल, शुक्र और सूर्य तक भी पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता.! चाँद की क्या बिसात, वो तो ये एक घंटे में तीन बार तोड़ कर अपनी सजनी के पैरों पर रख देते हैं! बेकार में इसरो-नासा पे खर्चती सरकार इन प्रतिभाओं को समझती ही नहीं!
खैर, अगले दिन न्यूज़ पेपर पर, पार्क में इन वीरों के भीड़ की, चमकती फोटो को, फ्रंट पेज पर सुसज्जित देख कर हम ये अंदाज़ा लगा सकते हैं कि प्यार के दुश्मन भी उतनी ही शिद्दत से लगे हुए हैं कि हमको प्यार नहीं मिला तक तुमको भी नहीं करने देंगे।
वैसे देखी जाये तो ये अच्छी बात ये है कि देश को अब डरने की ज़रूरत नहीं। हमारे पास अनन्य शूर वीर हैं, बस सिलेक्शन प्रोसेस १४ फ़रवरी को हर साल पार्क में होने चाहिए, फिर देखें कौन देश हमसे उलझ पाएगा। आर्मी वाले पार्क के बाहर खड़ी विरोधी सेना से रिक्रूटमेंट कर सकती है। एयरफोर्स वालों को पार्क के अंदर हवा में उड़ते, हवाई उड़ाते प्रेमियों को रिक्रूट करना चाहिए। हम अंतरिक्ष में नहीं जाते, हम तारे ही तोड़ घर ले आते हैं। खैर हमें वादों से क्या, हमें तो वीरों से मतलब है। हमारा दिल से सम्मान इन सब देश के कर्णधारों के लिए। जो देश में प्यार, रौनकता, ग्लैमर और एक्शन बरक़रार रख रहे हैं।
ऐसे ही देश में, प्यार और खुशहाली बनी रहे !
आर्टिकल: आभा रश्मि एवं सन्नी शुक्ला
सर्वाधिकार सुरक्षित: ठेठ पलामू




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