रेडियो में गाना बजत बा " पिया तोसे नैना लागे रे....."
इहे बीच हमीन के धमाचौकड़ी के कारण, बाबुजी जे पूरी तन्मयता से गीत में डूब के अलौकिक आनंद की प्राप्ति में लीन रहत रहन, आपन मानसिक व्यायाम में व्याधान से रौद्र रूप धारण कर लेवत रहन।
"तोहीन चुप रहबs की ना? जादे काएँ-काएँ कइलs तो हमरा उठे ला पड़ जाई। उठ गईलि न हम, तब नीचे से उपरे ले गुलगुला देब....."
हमीन आपन बचपन में अइसन अनुभव से बहुते गुजरल ही। चलूं 'विश्व रेडियो दिवस' पर बचपन की उहे सुनहरी यादों को फिर से जियल जाए।
और अक्सर देखल जात रहे कि घर के बुजुर्ग मर्फी के रेडियो या फिलिप्स के रेडियो(दहेज में मिले वाला सबसे बेशकीमती सामान रहे रेडियो) लेकर 7:30 बजे BBC लगाके सुनत रहन। उ घड़ी अगर हमीन तनिको बदमाशी करली, त ऊपर से नीचे रिनूवल होए के गारंटी रहे।
धरती पे बेसुधे सूतल हमीन के उठावे ला, आकाशवाणी कार्यक्रम भोरे-भोर गार्डियन लोग तेज आवाज में चला देवत रहन। अब के नवका जमाना के फिल्मी गीत वाला "तेरा प्यार हुक्का बार..." बजावे वलन प्राइवेट रेडियो चैनल, आकाशवाणी के जगह कहियो ना ले सकsलन। हमर बाबूजी 1965 में पहिला रेडियो खरीदले हलन। आउ आजो हमर घरे रेडियो बजsला। एगो ई फोटो रउवन के नॉस्टैल्जिक करे खातिर डालत ही।
" Happy World Radio Day "
आर्टिकल एवं तस्वीर: Shashank Suman
सर्वाधिकार सुरक्षित: ठेठ पलामू

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