Wednesday, February 1, 2023

जाड़ा के रात: छंद बद्ध प्रबंध काव्य शृंखला

  तीसरी कड़ी में आज प्रस्तुत है हरिगीतिका छंद दिव्या की आवाज में.

गीत रचना: ठेठ पलामू की टीम
हरिगीतिका छंद
जाड़ में तोसक रज़ाई, हर घरे घंटहीं ला बा।
केतनो जतन से फिंचली, खोली ओकर फटहीं ला बा।।
अब अगर केकरो दुहारी, चार अगुआ आई तो।
कने बिठावे, कहाँ सुतावे, ठंढ कईसे बिताई वो।।
साड़ी धोती में पूरा, भर के नेहाली बन जाला।
नीचे भूसा उपर पूरा, रख के जे हाली बन जाला ।।
जे माटी के बेटा रही, बिलकुल फुटानी ना करी।
आधी व्याधि साधी के, आपन निशानी से भरी II
©सर्वाधिकार सुरक्षित ठेठ पलामू

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