तीसरी कड़ी में आज प्रस्तुत है हरिगीतिका छंद दिव्या की आवाज में.
गीत रचना: ठेठ पलामू की टीम
हरिगीतिका छंद
अब अगर केकरो दुहारी, चार अगुआ आई तो।
कने बिठावे, कहाँ सुतावे, ठंढ कईसे बिताई वो।।
साड़ी धोती में पूरा, भर के नेहाली बन जाला।
नीचे भूसा उपर पूरा, रख के जे हाली बन जाला ।।
जे माटी के बेटा रही, बिलकुल फुटानी ना करी।
आधी व्याधि साधी के, आपन निशानी से भरी II
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