सब्बे प्यार के कहानी का अंत दुखद नहीं होता है। हालांकि कुछ कहानी में लड़कन, तो कुछ में लड़कियन धोखेबाज निकल जाती है, तो कुछ में अन्य तत्कालिक कारण आ जाते हैं। हालांकि पलमुवा प्यार में बहुत चोंचला ज्यादा है। एक तो दिल को भा जाए अइसन कहीं लड़की दिखना ही मुश्किल है, पता नहीं सब लड़की लोग कौन खोह में छुप के रहती है। ऊपर से आपन जाती के देख के प्यार करो, फिर मैडम लोग को मनाना, चिरौरी मनौरी करना तो और भी असंभव काम है। जब सब सेट हो जाये, तो घरे वलन का ड्रामा शुरू हो जाता है। जलनखोर लोग जेकरा खुद कहियो प्यार नहीं मिला है, वही सब प्यार के दुश्मन रहेगा। अब इस कैटेगरी में केकरो भाई, तो केकरो माई, किसी की भौजाई, तो केकरो बाबुजी भी प्रेम का गला घोंटते दिख जाते हैं।
लेकिन इन सब सामाजिक अवरोधों को रौंदते, एक हमारे परम मित्र हैं, प्रेमिका से लॉकडाउन में बियाह कर के मित्रों और रिश्तेदारी में अपना बाहुबल का झंडा गाड़ चुके हैं और बहुत से चुटपुटिया देवदास लोगन के लभ गुरु भी हैं।अपने खतरनाक तिकड़मबाजी के कारण अगुवाई में भी अच्छा खासा नाम कमा रहे हैं, एक बियाह खतम हुआ नहीं कि दूसर बियाह कमाए के जुगाड़ लगा देते हैं। क्या मजाल कि कोई उनकी प्रेम कहानी का कभी मजाक उड़ा दे, सभी मजाक की कोशिशों का सुरमा भोपाली के स्टाइल में एक ही जवाब है "औकात हऊ त आपन वाली से बियाह कर के देखाव ना, प्यार करबे तू, आउ बियाह के कउनो दूसर ले जतउ।"
अब इसके बाद अगला बेजुबान हो जाता है, अपनी लभ-स्टोरी का दुखद अंत याद आ जाता है। एक दिन उनसे पूछ ही लिए कि आखिर सफलता प्राप्त कैसे हुआ आपको, वो भी पड़ोस में ही। शुरू में तो लईका थोड़ा ऐंठाया, फिर बताना स्टार्ट किया। "हुआ यूं कि वो ठहरी हमरे भइया की साली, मोबाइल खाली हमरे पास था, भौजाई फोन करती थीं, भैया से बात करे ला, एक दिन साली भी अपन जीजा के फोन की, भइया थे नहीं, आवाज हमको भा गया, नदी कपड़ा फिंचने जाती थी, तो देखिए लिए थे, सुंदर तो मैडम हैं ही, अब बस सेटिंग करना बाकी था।
अब हल्का फुल्का बात स्टार्ट किए, खाना खाए कि नहीं? जब भी पूछती थी तो कसम से दिल बाहरे निकल के रेचो खेले लगता था। माई तो गरिया के पूछती थी खाये ला, पहिला बार कोई प्यार से पूछा था हमर खाये के बारे में।
पार्टी पॉलिटिक्स में अंबानी के तुम लोग लाख गाली दो, लेकिन हम तो आज भी ओकरा भगवान मानते हैं। रिलायंस मोबाइल फ्री कॉलिंग नहीं होता, तो आज मैडम भी हमरी नहीं होती।
फिर हम पूछें ई सब छोड़ गुरु घरे सेटिंग कइसे करले ई बताव, "पर कैसे बताए गुरु। ऊ का हुआ कि भइया बोले कि हमर साला के रांची जाना है, मन त नहीं था लेकिन साथ में चले गए, साला से थोड़ा पूछे कि और लड़की दोस्त गर्लफ्रेंड रखें हैं? बेचारा फिर लातेहार तक तो अपना प्यार का कहानी सुनाया, पूरा अपना दुख दर्द दिल निकाल कर रख दिया। फिर हम बोले बेटा अब तू रुक, हम भी अपना लभ स्टोरी सुना दिहिन। फिर पूछा कि इतनी अच्छी लड़की कौन है, आप जाके उसके घर वालों से बात क्यों नहीं करते हैं। हमहूँ आव देखे ना ताव, बोल दिए कि तुमरी दीदी ही ना है। अब ओकर मुंह तो लाल हो गया, लेकिन अब का करता बेचारा। ऐसे ही फिर बात लीक हुआ। दुनों के घर वाला सब तो शुरू में बहुत काबिल बना, लड़की के घर वलन इतना जलील किया कि आज भी हम ससुराल नहीं जा पाते हैं। सब हमको बेरोजगार बोल दिया, मैडम बोली भी कि दिल्ली कमाने चल जाइए, लेकिन हम भी मोछ के ताव में यहीं रहे। लेकिन आज देखिए बिजनेस टायकून हैं हम।"
लेखक: Sunny Shukla Rohan
सर्वाधिकार सुरक्षित: ठेठ पलामू

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