Monday, January 16, 2023

" खिचड़ी "

लइकन चेंगन बुढ़ो पकाए
बीमारी में पथ्य कहलाए
मां दुर्गा के प्रसाद चढ़ाए
पानी सूख पोंगल बन जाए
सबे खिचड़ी के महिमा गाए
खिचड़ी गरमे-गरम ठीक लगता है और ठंडा में तो गरम खिचड़ी मने अमृतपान। खिचड़ी कइसनो बनाया जाए स्वादिष्ट ही बनता है, लेकिन साथ में यदि आलू, गोभी, मटर, गाजर, बिन्स मिलाकर बनाई गई हो, तो आनंद की सीमा पार हो जाती है।
खिचड़ी आपके आप में कम्पलीट फूड है, कार्ब-प्रोटीन तो है ही, सब्जी डाल दीजिए तो विटामिन की खान भी। ज्यादा पानी आपके शरीर को रि-हाईड्रेट भी कर देता है। जिसको कुछ नहीं आता है बनाने वो भी खिचड़ी बना लेता है। विद्यार्थी लोग तो पकाता ही है, लेकिन जब मम्मी कहीं जाती थी, तो पापा भी बस खिचड़ी ही बना कर खाते थे।
यों तो खिचड़ी ऐसा भोजन है, जिसे जब मन हो, फटाफट बनाइए और खाइए, परंतु हमारी सांस्कृतिक परंपरा में कुछ विशेष भोजन के लिए खास दिन भी निर्धारित हैं। उसी तरह खिचड़ी खाने के लिए भी पलमुवा भाषा में #मकरात का दिन खास है, जो कि संकरात के दूसरे दिन मनाया जाता है। ऐसे आम दिनों में तो हमलोग हर शनिवार और यदाकदा बुधवार को खिचड़ी खाते ही हैं, पर मकरात की खिचड़ी खास होती है।
ठंडी के शुरुआत में ही नए धान की कटाई होती है और नए चावल से बनी खिचड़ी खाने की परंपरा मकरात में है। मूँग, उड़द, मसूर या फिर अरहर आपको जो भी दाल पसंद हो, उसे चावल में मिलाकर खिचड़ी बनाइए। अगर सादी खिचड़ी खानी हो, तो मूँग दाल डालकर बनाइए, नहीं तो सभी तरह की दालों को मिक्स करके 'नवरत्न खिचड़ी' खाइए। कहने का मतलब है कि ये एक ऐसा भोज्य पदार्थ है, चाहे जैसे भी खाइए स्वादिष्ट ही लगेगा।
पलमुवा में एक पंक्ति प्रसिद्ध है, खिचड़ी के हैं चार यार :- दही, पापड़, घीव, अचार। बात भी सही है कि इनके बिना खिचड़ी का स्वाद अधूरा है, एक भी यार कम नहीं होना चाहिए। लेकिन खिचड़ी के साथ #चोखा की भी दमदार यारी है। अगर सब्जियां मिलाकर खिचड़ी बन रहीं, तब तो चोखा के बगैर काम चल भी जाए, परन्तु सादी खिचड़ी में तो चोखा का साथ बहुत जरूरी है।
आप सभी पाठकगण भी मकरात की खिचड़ी खाइए और फोटो हमसे साझा कीजिए। साथ ही यह भी बताइएगा कि आपके यहां कौन-से चावल-दाल में खिचड़ी बनती है ?
© दिव्या रानी
May be an image of food and text that says "खिचड़ी"

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