Thursday, January 12, 2023

जाड़े का मौसम और सेम की सब्जी

अस्वीकरण: यह पोस्ट ठेठ पलामू पे कुछ दिनों पहले आये 'मुर्गा-भात' पोस्ट पर एक शाकाहारी का प्रत्युत्तर है, जो कि उस पोस्ट के आने के बाद से ही भरपूर जलन एवं उसका काट ढूंढने की भावना से प्रेरित है। सभी सर्वाहारी बंधुओं को पूरा अधिकार है, इससे अस्वीकृति का, क्योंकि मुझे विश्वास है कि आप अंतत: इस पोस्ट से स्वयं को जरुर जोड़ पाएंगे।
जी तो बात करनी थी आज सेम की। जाड़े का मौसम और किटकिटाती ठण्ड से लड़ते हुए आप कौवा-स्नान कर के आयें और आपके सामने गरमा-गरम, मने एकदम भाप निकलता हुआ सेम का सब्जी (सरसों, मिर्च, लहसुन और अदरख का प्रयोग कर बनाया गया चटख झोर वाला) और भात खाने में परोस दिया जाये, कसम से स्वर्ग का आनंद आता है। इसके सामने मुर्गा-भात भी फेल है (कमसे कम हम शाकाहारियों के लिए तो जरूर)। एक-एक कौर पर आपकी अंतरात्मा भरपूर धन्यवाद देगी, उस भगवान को जो बाकि सब रचने के क्रम में सेम जैसा सब्जी को भी पृथ्वीलोक पर उपलब्ध कराये हैं। इतना ही नहीं, भगवान सेम को बनाते समय पूरा मूड में थे- इस एक सब्जी में कई तरह के रंग भरे उन्होंने- हल्का हरा, गाढ़ा हरा, सफ़ेद, बैंगनी, काला और भी हो शायद, मतलब उनका भी विशेष ध्यान था इसपर।
अच्छा बताइए कि इस मौसम में जब आप वही आलू-मटर-बैंगन-पत्तागोभी-फूलगोभी (वो भी हाइब्रिड वाला) खा-खा के उबिया जाते हैं, तो कौन-सी ऐसी सब्जी होती है, जो आपका बेड़ा पार कराती है- यही सेम ही न और मजे की बात कि ये सबसे सुलभ सब्जी है। हमारे गाँव-घर में शायद ही ऐसा कोई घोरान/बाउंड्री होगा, जिसपर सेम के लतर चढ़ल न मिले और वो भी भरपूर लदा हुआ न हो सेम के फल से। है कोई दूसरा सब्जी, जो इतना आराम से आपको उपलब्ध हो जाये, वो भी एकदम फ्रेश, जिसको कि कोई आर्गेनिक सर्टिफिकेशन का भी जरुरत नहीं। अरे! एकदम बिना यूरिया-डीएपी वाला सब्जी है ये और न ही दुनिया भर के कीटनाशक का छिड़काव होता है इसपर (बाजार से खरीद के ला रहे हैं, तो उसका गारंटी नहीं, काहे कि अब इसकी व्यावसायिक खेती भी खूब हो रही है) और तो और, सेम को आप गरीब-अमीर वाला कैटेगरी में भी नहीं बाँट सकते (जैसे कि कुछ दूसरा सब्जी सब होता है न कि फूलगोभी हमलोग का सब्जी और ब्रोकली 5- स्टार, हरा वाला शिमला मिर्च हमारा और लाल-पीला वाला 5-स्टार), सेम सबको समभाव से उपलब्ध है। आपके बारी में नहीं है, तो कोई बात नहीं, बगल वाला के घोरान से तोड़ लीजिये, कोई कुछ नहीं बोलेगा।
सेम का तासीर गरम होता है, इसलिए ठण्ड के मौसम में इसका सेवन और बढ़िया है। हाँ, इ बहाना मत बनाइएगा कि ये बाई-कारक सब्जी है, गैस बनता है। अरे! बनाइये इसको हींग का छौंक मार के। उल्टे इसको खाने का फायदा गिनाएं- और फायदा भी वही सब जो आज के समय में हम सब लोगों को बहुत आकर्षित करता है और जरूरी भी है- सेम में प्रचुर मात्रा में कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम, प्रोटीन और कैल्शियम होता है। इसके सेवन से हम दिल की बिमारियों से दूर रहते हैं, मोटापा कम होता है, सूजन रहने पर इसके बीजों को पीसकर लगाने से आराम मिलता है। अरे और भी बहुत गुण हैं, लेकिन औषधीय गुणों पर तो एक्सपर्ट और बताएँगे, हम तो आनंद की बात करेंगे।
बात शुरू हुआ था सेम के सब्जी से, लेकिन ऐसा कोई मजबूरी नहीं कि आप सिर्फ इसकी सब्जी ही बनाएं। भुंजिया भूंज के खाइए, उसका अलग मजा है और फिर रोज-रोज के झंझट से बचना है और इसका एक और नैसर्गिक स्वाद लेना है, तो फिर इसका सौंदा बनाइये न, फिर सप्ताह भर खाइए, रोटी और भात दोनों के साथ।
अगर सेम से जुड़ी कोई और मजेदार रेसिपी आपके पास हो, तो इस पोस्ट के कमेंट में जरूर बताइए, काहे कि हम खाने-पकाने में बहुत आनंद लेते हैं और खोजते रहते हैं ठेठ और देसी रेसिपी।
अंत में एक और बात – रिवाज के अनुसार हम सेम के सब्जी और भात वाला थरिया का फोटो नहीं लगा पा रहें इस पोस्ट के साथ, काहे कि जैसे ही सामने आया हम टूट पड़े उसपर और फोटो रह गया।
आलेख: रितेश पाठक
कैमरा: सुधांशु रंजन
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