Saturday, March 20, 2021

देवगन, अर्थात् देवताओं की नगरी

 #ठेठ_पलामू: देवगन, अर्थात् देवताओं की नगरी ।

सिर्फ यहां का मंदिर ही नहीं, आसपास का पूरा इलाका ही मध्यकालीन इतिहास का श्रेष्ठ धरोहर है । यहां के मंदिरों, तालाबों और प्राचीन कुओं में जो ईंटें लगी हुईं हैं, वे नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर वाली ईंटों जैसी ही हैं ।धाम के मुख्य राधाकृष्ण मंदिर के गर्भगृह की दीवारों का दो तरफ से 10-10 फीट और एक तरफ से 15 फीट चौड़ा होना सभी इतिहासकारों और पुरातत्ववेत्ताओं को चौंकाता है । इतनी मोटी दीवार अमूमन किसी भी प्राचीन मठ या मंदिर का नहीं है । लोग कयास लगाते हैं कि कहीं इन दीवारों के भीतर कुछ ‘बहुमूल्य’ तो नहीं है ?

प्राचीन मंदिर और सूर्य मंदिर समेत कई स्थानों पर तरासे गये पत्थरों से बने अद्भुत और सुंदर स्तंभों का मिलना बताता है कि यह स्थान पुरातन सभ्यता से नाता रखता है ।

गढ़ के पश्चिम में एक भवन का खंडहर है । एक कुआं भी है । यहां से कांच एवं पत्थर के गोले मिलते रहते हैं । ग्रामीणों का कहना है कि ये गोले तोपखाने के हैं । गढ़ के उत्तर दिशा में एक प्राचीन पोखरा भी है । यहां भी एक मंदिर का अवशेष विद्यमान है ।सोन नदी घाटी पुरातत्व परिषद् से जुड़े इतिहासकार अंगद किशोर बताते हैं कि 13 वीं शताब्दी में रक्सेलों के यहां आने के पूर्व खड़िया, खरवारों और मार्हों ने देवगन को आबाद किया था । इतिहास हवलदारी राम गुप्त के मुताबिक 1613 ई० में चेरो सेना नायक भगवंत राय ने रक्सेल राजा मानसिंह को धोखे से पराजित कर दिया तथा देवगन, तरहसी समेत संपूर्ण पलामू से रक्सेलों को भगा दिया । बावजूद इसके, सरगुजा की सीमा पर रक्सेल लड़ाकों ने जब लूटपाट जारी रखी तो इस स्थिति से बचने के लिए भगवंत राय ने रक्सेलों से सुलह के तौर पर अपने बेटे उदय करण की शादी रक्सेल राजा की लड़की से कर दी । शर्त था कि इस लड़की से उत्पन्न लड़का ही पलामू का राजा बनेगा ।

लेकिन भगवंत राय के जीवन काल में ही उदय करण की मौत हो गयी । उनके रक्सेल रानी के गर्भ से उत्पन्न लड़के तेज राय और दरया राय नाबालिग थे । इसी का लाभ उठाकर उनका सौतेला भाई अनंत राय गद्दी पर बैठ गया । कुछ ही वर्ष बाद परिवार में फूट पड़ गयी । तेज और दरया शाहजहाँ काल के मुगल सूबेदार इतिकाद खां से मिलकर अनंत राय को गद्दी से हटा दिया । लेकिन जब तेज ने दरया को राज्य में हिस्सा देने से इंकार कर दिया तो दरया मुगल सूबेदार जबरदस्त खां से मिल गया और 1643 ई० में उसने देवगन पर चढ़ाई कर दी । देवगन की पहाड़ियों पर घोर युद्ध हुआ । मुगलों और दरया से हारकर तेज राय जंगलों में भाग गया ।

1771 में पलामू अंग्रेजी शासनकाल में कर राज्य बना । कर्नल कैमक ने देवगन की रियासत पलामू के राजा गोपाल राय से लेकर सुगंध राय के वंशधरों को दे दिया । 19 शताब्दी के पूर्वाध में देवगन के जागीरदार शिव वक्श राय थे जिन्हें अंग्रेजों का खास आदमी माना जाता था । मध्य काल में जपला-देवगन-खड़गडीहा मार्ग ऐतिहासिक मार्ग था, जिससे होकर शेरशाह का बंगाल आना-जाना होता था ।

देवगन धाम का एरिया करीब 40 एकड़ में फैला है । चारों तरफ मन मोह लेने वाली प्राकृतिक सुंदरता । एनएच 98 से देवगन धाम तक जाने के क्रम में ही प्राकृतिक सुंदरता आपका मन मोह लेगी । 1966 में सुल्तानी के नागा संत बाबा गोविंद शरण दास ने मुख्य मंदिर की खुदाई करवायी और राधाकृष्ण मंदिर स्थापित किया । उनके बाद मंदिर के महंत बाबा साहेब बिहारी दास ने मंदिर को अबतक सजाया संवारा है और सतत् प्रयत्नशील हैं कि यह स्थान पूरे देश में मशहूर हो । स्थानीय ग्रामीणों का भी उन्हें सतत सहयोग मिल रहा है । अब देखना है कि इनके और धाम के उम्मीदों के भविष्य का क्या होता है ।देवगन की बावत दर्जनों कहानियाँ हैं । इन कहानियों का इतिहास तो नहीं है लेकिन ये कहानियाँ लोग बरसों से सुनते आ रहे हैं । इन कहानियों को हर पुरानी पीढ़ी ने हर युवा पीढ़ी को सुनायी है ।

देवगन धाम के ठीक सामने दो पहाड़ियाँ दिखायी देतीं हैं । इनमें एक का नाम है योगी और दूसरे का योगिनी । नदी के किनारे होते हुए भी ये दोनों पहाड़ियाँ पेड़-विहीन हैं । कहा जाता है कि प्राचीन काल में उक्त दोनों स्थानों पर दो मठ थे जहां अलग अलग एक योगी और एक योगिनी तपस्यारत थे । एक दिन ऐसा आया कि योगी ने योगिनी की ओर देखा और फिर कई एक वर्षों तक दोनों एक दूसरे को अपलक निहारते रहे । फिर प्राकृतिक घटना घटी और मठ सहित वे अलग अलग पहाड़ियों में तब्दील हो गये ।

कहानियाँ तो सूर्य मंदिर और तालाब की भी है और द्वारपाल नामक पहाड़ियों की भी । लेकिन एक मजेदार कहानी देवगन के गढ़ की है । कहा जाता है कि इस गढ़ के खंडहर के नीचे अब भी अकूत धन संपदा दबी हुई है । लेकिन इसे कोई ले नहीं जा सकता । जिसने भी गढ़ के किसी वस्तु को हाथ लगायी, वह बेमौत मारा गया और उसका परिवार बर्बाद हो गया । इसी किवदंती और डर से लोग गढ़ का मिट्टी तक उठाने में डरते हैं । वहरहाल, ऐसा बहुत कुछ है यहां, जो आपको बार बार देवगन आने पर मजबूर करेगा ।

अरुण कुमार सिंह
छत्तरपुर
वरिष्ठ पत्रकार
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