ठेठ पलामू की बातें
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पलामू कहें या डालटनगंज या फिर कहें मेदिनीनगर , पर यही है मेरा मनपसंद छोटा सा शहर!
वैसे तो मैं भारत के कई शहरों में रह चुकी हूँ, और मेरा यह सफर अभी आने वाले दिनों में निरंतर जारी भी रहेगा। पर अपने अभी तक के सफ़र में मेरे दिल के करीब एक शहर है, जो बहुत बड़े शहरों जैसा तो बिल्कुल नही है पर जिंदादिली और बड़ा सकून देने वाला जरूर है, और वो है डाल्टनगंज, पलामू।
यहां मैं जी भर के जीती हूँ, और यहां के दोस्तों ने मेरा दिल जीत लिया है। वैसे तो भारत में कई ऐसे शहर है जहां कि कुछ खट्टी - मीठी यादें और मेरे खुद के अनुभव मेरे दिल में हैं , लेकिन आज मैं अपने मन-पसंदीदा शहर डालटनगंज का अनुभव आपके बीच शेयर करती हूँ । यह छोटा सा शहर अपने संस्कृति को संजोए हुए और ढेर सारी खुशियाँ समेटे हुए है। ये शहर किसी मेट्रो की तरह बहुत तेज़ी से भागता नही ब्लकि एक ठहरा हुआ शहर है जहां छोटी जगह में भी ढेर सारी खुशियाँ हैं।
यहां के लोगों की बात ही अनोखी है। अच्छे लोग जो आप का सम्मान करते हैं, आपके साथ खड़े रहते हैं। छोटी-छोटी खुशियों से लेकर बड़े-बड़े त्यौहार अपने पारंपरिक ढंग से मनाकर शहर को सच में और खूबसूरत बनाते हैं। यहां भले आपको मॉल, बड़े-बड़े बाजार, चौड़ी सड़कें, ज्यादा ट्रैफिक, ज्यादा भीड़ ना दिखे, पर एक शांत, अपनापन और मन को सकून देने वाला माहौल जरूर मिलेगा।
कहते हैं बिना दोस्तों के जन्नत भी अच्छा नही लगता। पर यहां मेरे दोस्त भी बहुत अच्छे हैं , जो मुझे ये अहसास भी नही होने देते की मैं यहां बाहर से आई हूँ। ऐसा लगता है ये ही जन्नत है यहां दोस्तों की महफ़िल और सबके साथ का मेरा अनभुव हमेशा मेरी जिंदगी की क़िताब में कैद हो गया है।
अब बात करते हैं यहां के खूबसूरती की। टाइगर रिजर्व, बेतला नेशनल पार्क की यात्रा मेरे लिए एक गज़ब की रोमांचक यात्रा रही है । हरियाली समेटे हुए ये जगह बहुत मनमोहक है। दोस्तों के साथ यहां घूमने का मज़ा ही अलग है।भले आपको बड़े जानवर न दिखे पर पूरे सफ़र में एक रहस्य और रोमांच से आपको थकान नही होगी भले आप दिन भर टाइगर खोजते रहो। कोयल नदी के किनारे पिकनिक कई बार मनाया और हमेशा लगा कि अभी फिर से आना है। केचकी संगम और फोर्ट का रहस्यमयी और रोमांचित करने वाला इतिहास यहां इन सब को देखने के बाद ही समझ मे आता है ।
पलामू के शानदार सफ़र में अगर यहां के प्रसिद्ध खाने का ज़िक्र न हो तो बात अधूरी रह जायेगी। एक शानदार शहर की यादों में वहां के फ़ूड की बहुत भूमिका होती है और पलामू में तो शानदार स्वादिष्ट व्यंजन ऐसे हैं कि बस खाते जाओ - खाते जाओ और उनके ही गुण गाते जाओ। चलो बताते है कुछ के नाम जो यहां गज़ब का बनता है। देसी स्टाइल और गज़ब का स्वाद में #धूस्का, #भभरा, लिट्टी ,ठेकुआ , गुड़ का रसगुल्ला , खीरमोहन, स्पेशल कलाकन्द , और थकान दूर करने वाली कुल्हड़ में चाय। और हां कुछ मीठा हो जाये में ख़जूर का गुड़ भी ले लीजिए। वाह क्या गजब का स्वाद है गुड़ का बस पूछो मत खाओ और फिर बताओ।
और एक बात जो यहां मेरे मन को छू जाती है कि यहाँ अधिकांश लोग एक दूसरे के साथ मिलकर रहते हैं। यहां के कुछ मंदिर जिनके दर्शन से ही मन शांत हो जाता है। छःमुहान पर माँ काली जी का मंदिर, रेड़मा में माँ का मंदिर, शिवाला घाट वाले रामजानकी मंदिर, शिवमंदिर, शनिमंदिर, नावाटोली में हनुमान मंदिर और स्टेशन रोड पर शिव मंदिर के दर्शन जरूर करें अगर यहां आए हैं तो। मैं तो गुरूद्वारा में आयोजित कई कार्यक्रम में गई हूँ यहां होने वाला गुरु का कीर्तन और ‘गुरू का लंगर’ मेरे लिए कभी न भूलने वाले पल है।
पलामू में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम और यहां की परंपरा से जुड़े उत्सव बहुत ही रोमांचकारी होते हैं जिनकी तैयारी और उनमें शामिल होना मेरे लिए बहुत ही स्पेशल है, खास कर छठपूजा तो मैं अपने लाइफ में हमेशा याद रखूंगी।
ऐसे ही बहुत सी बातें हैं शायद ये अनुभव लिखते ही जाऊंगी पर पलामू के बारें में फिर भी कुछ न कुछ रह ही जायेगा। इस लिए अब बस इतना ही कि पलामू मेरे सबसे पंसदीदा शहरों में से एक है और हमेशा रहेगा ।
©श्वेता शर्मा

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