Tuesday, June 26, 2018

पहिले दफा


फ्लाइट से पहीला बार जतरा करइत हली। अइसे तो आज तक हिम्मत न परल रहे पर उ मुहजरौनी सेठ के बेटिया संतोषिया के का कहल जाओ, जे उ सबितवा के प्रेमी के तारिफ करे लगलक कह कह के उ त हवाई जहाज से जा हई नौकरी पर, बड़ी बड़ा आदमी हई। अब ई लाइन बाज़ी के चक्कर मे टिकट कटवा के हमहूं बैठ गेली प्लेन पर आपन जनमगदह उतारे ला।

उपरे उड़े के नाम पर तो अकबकी आउ धकधकी से हालत खराब हलक लेकिन, तबो आसपास  वलन के देख के हिम्मत बांधले हली। अब गांव जा के सब के बताहूँ ला तो होई कि कइसन लागेला, कइसन होवेला? वैसे भी गाँव के पहिला लड़का होइब जे जामल घरी से अभी तक जहाज पर चढ़ल होवे!

अब खुले के टाइम हो गेल हलक। एयर होस्टेस पूरा मुहँ बना -बना के जइसे- जइसे बतइलक ओइसे- ओइसे कर लेली। प्लेन उड़ पड़ल, जइसे जइसे स्पीड पकड़ल करेजा के धकधकी तो समझूँ  कि दू-चार दिन के बदले आझे धड़क जाई। आउर जइसहीं जमीन छोड़लक शरीरे सुन्न हो गइल।

दस पनरह मिनट बाद जा के कुछ बुझाइल, उहो तब जब हँस के एयर होस्टेस अंग्रेजी में पुछलक - कुछु लिजयेगा का? अब खा के तो चलल हली, लेकिन एतना सुंदर लईकी आके एतना परेम से पूछे आउ ना कह देब तो नरको में जगह मिली? दु सौ रुपया के दु गो सिंघाड़ा लेली मन मार के। एतना में तो 2 दिन पूरा गांव के सिंघाडा खियौति।

अब सब ठिक से चलइत हलक खाली तनी मनी कान सुसरुआइत हलक। तबे अचानक प्लेन में तनी हलचल होइल। काहे हो? काहे हिले लगा प्लेन? गिरेगा का? मरेंगे का?

'मौसम में खराबी होगी ' - एगो बगल वाला अपना कबलइति देखावे ला कहलक। तब तक हमर बगल वाला भी कितबवा में हावा भर के कूदे वाला फ़ोटो देखे लगल! ओकरो पहिले बार हलक, ई तो ओकर करेजा के धकधकीये देख के पाता चलइत हलक। एयर होस्टेसवन भी ढेरे डेराइल हलन तबो झूठे जबरी मुस्कुराईत हलन! उ सब के देख के मने-मन टेंसन बढ़ईत हलक। तब तक बगल के एगो आदमी दोसरका के कहे लगल कि - "ट्रेन एक्सिडेंट मे तो फिर भी बचने की गुंजाइश होती है पर ..."
अब एतना सुनते हम तो वीर कुंवर से लेके गाँव-गमहेल सब के गछ देली। बस अबकि बार बचा दिहें! ई ग़लती अब न होखी। ई मुहजरौनी जे न करा देलक। का मजे के ट्रेन के स्लीपर में जा हली बेडशीट ओढ़ के! इहाँ मर जाईब तो घरे बताहूं वाला के बची? सब तो मरिए जइहें! फोनो के नेटवर्क नईखे! जियो खरीदे के काम हलक? ना केकरो फोन में नेटवर्क नईखे एतना ऊपरे!

जइसे तइसे मामला ठीक होइल, तब जा के हमहुँ सोचे लगली कि आखिर उ छौंड़ी तो हमरे खातिर न एतना कइले रहे। ऊ तो ईहे ला न हमरा प्लेन के टिकट कटावे ला जोर देलक कि ओकर जान के आवे-जाये में कउनो तकलीफ न होवे। खैर ओकर गलती ना हलक!

अब तो हमरा दोसरे चिंता सतावे लागल -
"अगर हम मर जाइति ऊपरहीं तो का कभी हमर सन्तोसीया जाने परतक कि हम मरे-मरे घरी ओकर बारे में का सोचईत हली? आउ पता नहीं केतना दिन के बाद ओकरा हमर मरे के खबर मिलतक, शायद नहियों मिलतक! पता नहीं उ केतना दिन तक हमर इतंजार करतक ...?"

इहे सब सोचते रही कि ओने से आवाज़ आइल-" अपनी कुर्सी के पेटी बांध लें विमान लैंड करने वाली है"

बेल्ट बांध के हमहूं भगवान के नाम लेवे लगली। कि बस इहे पहिला आउ अंतिम बार रहे ई अगिया फूंकाव आसमान में उड़े वाला यात्रा के। जइसहीं उतरली, उतर के धरती माई के परनाम करली। आउ घरे पहुचते, बघउत बाबा के दूसरे दिन जोड़ा घोड़ा चढ़वाईली।

जान में जान आ गेल आउ हमार जान भी सब जान गेल!

© पूटेसर कुमार

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