Sunday, June 3, 2018

ठेठ_पलामू के एडमिन की तरफ से एक चिट्ठी

ठेठ पलामू के एडमिन की तरफ से एक चिट्ठी
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आदरणीय ठेठ पलामू के पाठक गण!

आप सबको समर्पित यह चिट्ठी और कुछ नहीं हमारे हृदय के उद्गार मात्र हैं. आपने जो अपार स्नेह हमें दिया है बस उसके लिए अभिवादन स्वरूप है यह पोस्ट, अगर आपके हृदय स्थल तक पहुंचने में सफल हो जाए तो हमें जरूर सूचित किजियेगा, हम अपलक प्रतीक्षारत हैं.

एक कहावत है कि दूध बिकने घर घर आता है और शराब पीने लोग घर छोड़ कर निकल जाते हैं.

तात्पर्य यह कि अच्छी चीज़ों को ही अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है.

हम भी चाहें तो राजनीतिक, सांप्रदायिक या धार्मिक उन्माद वाले सस्ते पोस्ट डालकर रातो रात प्रसिद्धि का स्वाद चख सकते हैं. हम जब चाहें तब समसामयिक गर्म मुद्दों में घी डालकर अपने चूल्हे को ज्वालामुखी में बदल सकते हैं. हमारे पास रोज ही ढेरो ऑफर आते हैं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विज्ञापन के लिए. हम भी कुछ पैसों के बल पर अपनी हर पोस्ट पर हजारों लाइक बटोर सकते हैं.

मगर फिर क्या होगा?

हमारा मूलभूत उद्देश्य समाप्त हो जाएगा. हमारे अभियान की आत्मा मर जायेगी. पेज भले रातो रात सुपर हिट हो जाए, गुणवत्ता गिरने लगेगी. और ये हम बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं.

हमारी पॉलिसी है कि आर्टिकल के गुणवत्ता को मेंटेन रखा जाए हर हाल में. हमारी टीम हर आर्टिकल पर विचार विमर्श करती है, तथ्यों की पड़ताल करती है, किसी की भावना आहत न हो इसका ध्यान रखती है, वर्तनी और व्याकरण के हिसाब से एडिटिंग होती है, रोचकता बनाए रखने के लिए कुछ वाक्य जोड़े घटाए जाते हैं, तब जाकर आर्टिकल को पोस्ट किया जाता है.

एडमिन टीम के सारे सदस्य अपनी नौकरी में से कीमती समय निकालकर ठेठ पलामू के लिए योगदान देते हैं. तभी कोई आर्टिकल आपको परोसा जाता है. आप समझ सकते हैं कि क्यों हम दिन में बस एक आर्टिकल पोस्ट कर पाते हैं.

अभी भी हमारे पास दर्जनों लेखकों के सैकड़ों आर्टिकल पड़े हुए हैं ठेठ पलामू से प्रकाशित होने के लिए. उनमे से क्वालिटी आर्टिकल को चुनाना, समय और परिस्थिति के अनुरूप उसकी प्रासंगिकता तय करना, एडिटिंग और चित्रों का चुनाव इन सब प्रक्रियाओं को हम सश्रम और पूरी संवेदनशीलता के साथ मिल कर करते हैं. हमारी टीम के हर सदस्य वाकई बधाई के पात्र हैं.

मैं खुद तो वर्षों से अमेरिका में हूँ, पलामू के दर्शन हुए कई साल बीत चुके हैं. अभी के पलामू की वस्तुस्थिति से अनभिज्ञ हूँ, लेकिन हमारी टीम के अथक प्रयासों से 'ठेठ_पलामू' पेज पलामू के चप्पे चप्पे से जुड़ा हुआ है और जुड़ता ही जाएगा. और इसमे आप सब का योगदान अमूल्य रहा है. आपके सहयोग के बिना हम ये सफर शुरू ही नहीं कर पाते.

बस एक और बात.
लिखना एक कठिन कार्य है. रोचक लिखना उससे भी अधिक श्रम का कार्य. और क्वालिटी लेख को आप तक नियमित रूप से पहुंचाना उससे भी कठिन कार्य है जिसके लिए टैलंट के साथ साथ मनोबल और मोटिवेशन अत्यंत आवश्यक होता है.

नियमितता के लिए मेहनत करने का मोटिवेशन हमें कहाँ से प्राप्त होता है? आप स्वयं विचार करें? कि आखिर कोई भी व्यक्ति क्यों आपके लिए लिखेगा? क्यों अपना रोजगार छोड़ कर पेज पर लगा रहेगा? क्या सिर्फ अपने मनोरंजन के लिए या फिर किसी बृहत उद्देश्य की पूर्ति के लिए?

हर कोई लालची होता है, अलग बात है कि लालच का स्वरूप अलग अलग होता है सब में. मनोविज्ञान के शोध के दौरान मैंने खुद सिद्ध किया है कि हर एक मानवीय व्यवहार और प्रवृत्ति किसी न किसी लाभ या स्वार्थ के द्वारा ही संचालित या उत्प्रेरित होती है. जाहिर है हमारे एडमिन और लेखक प्रसिद्धि और प्रसंशा के लालची हैं, और इसमे कोई बुराई भी नहीं है. अब अगर उन्हें यही न मिले तो फिर क्या ये लगातार लिख पाएंगे? आप बुद्धिजीवी हैं, समझ सकते हैं.

खैर पिछली पोस्ट की प्रतिक्रियाओं से हम गदगद हैं. आपने हमारे गिरते मनोबल को मजबूती और सहृदयता के साथ सहारा देकर गगनचुंबी ऊंचाई दे दी है. हम दुगनी ऊर्जा से अपने अभियान में लगेंगे और पलामू की जीवनशैली और माटी की महक को पूरी दुनिया में एक पहचान दिलाएंगे. हम हर पलामू वासी के मन में 'अपनी माटी-अपनी बोली' के लिये अभिमान भरने के लिए प्रयासरत रहेंगे. बस आप अपना सहयोग और प्रेम बनाए रखें एवं समय समय पर हमारा मार्गदर्शन भी करते रहें, आपके हर सुझाव को हम सहर्ष स्वीकार करते हैं.

ढेर सारा प्यार और आभार.
आशीर्वाद बनाए रखिए.

©सत्यान्वेषी
🙏🙏🙏

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