Thursday, November 24, 2022

डाल्टनगंज-राँची रूट में लूटपाट

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कुछेक दशक पहले की बात है, जब शाम 4 बजे के बाद राँची के लिए निकलना हम पलामुवासियों के लिए साक्षात मौत का दर्शन करना होता था। कारण, रास्ते में लातेहार पार करते ही चोर-लुटेरों-डकैतों का खुला तांडव। शाम ढली नहीं कि कोई दुस्साहसी भी हिम्मत नहीं करता था, उन रास्तों को पार करने की। भय का आलम ये था कि बस भी नहीं मिलती थी शाम 4 बजे के बाद। रांची से पूरे राज्य के लिए रात्रि बस सेवा उपलब्ध थी, सिवाय डाल्टनगंज के लिए।
वक़्त बदला, प्रशासन चुस्त हुआ, विकास के पहिये ने रफ्तार पकड़ी। कभी खून की होली खेलने वाली बदनाम सड़क ने भी शांति की चादर ओढ़ ली। अब बेपरवाह होकर किसी भी वक़्त राँची- डाल्टनगंज - राँची की यात्रा होने लगी। फलस्वरूप डाल्टनगंज में भी बड़े-बड़े डॉक्टर, व्यवसायी दिन में काम निबटा शाम को राँची लौटने लगे। डाल्टनगंज वाले भी दिन में राँची का काम निबटा, देर रात तक वापस घर लौटने लगे। पर्यटन उद्योग भी धीरे-धीरे ही सही अपना पैर पसारने लगा। सुदूर पलामू अब बाकी राज्य से अच्छे से कनेक्ट हो चुका था। पलामू पर अशांत क्षेत्र का धब्बा धीरे-धीरे धुलने लगा था। लगा अब तो लूट-मार बीते कल की बात हो चुकी है। ये सब तो बच्चों को डराने की कहानियाँ भर हैं।
लेकिन कहते हैं ना कि शांतिकाल किसी तूफान के पहले की आहट होती है। इस रूट पर भी शांति ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। आय दिन गाड़ियों के लुटे जाने की खबर सुर्खियां बन रही हैं। पिछले दो माह में लगातार तीन चार दिल दहलाने वाली घटनाएँ घटी है लातेहार से कुड़ु के बीच में। यात्रियों को मारा पीटा गया है। महिलाओं से बदसलूकी की गयी है, उनके जेवर आबरू लुटे गए हैं। पुलिस प्रशासन सभी घटनाओं को सिर्फ एक संख्या मान रजिस्टर में नोट करता जा रहा है। मीडिया में इन घटनाओं को कभी स्थान मिला है कभी नहीं। तांडव जारी हो चुका है और भय का माहौल फिर से फ़िज़ा में घुल चुकी है। घातक रोग से मरणासन्न लोग अब पलामू में मरना पसंद कर रहे हैं बजाय कि रास्ते में लूट जाने के। आखिर कौन अपने परिवार की इज़्ज़त - संपत्ति लूटवाना चाहेगा। व्यापार निवेशकों के बीच पलामू फिर से डार्क स्पॉट बन कर उभरने लगा है। जहां एक तरफ दूसरे जिलों में बड़े बड़े संस्थान और उद्योग स्थापित हो रहे हैं, हमारे यहां पलामू वासियों के ओछी हरकत और आपराधिक छबि के कीर्तिमान गढ़े जा रहे हैं।
किसी भी विकास की पहली शर्त समाज में शांति ही होती है। उपद्रवी समाज कभी विकास नहीं कर सकता, जहाँ चोर-उचक्के अपनी लक्षणों से बाज नहीं आते, लक्ष्मी-सरस्वती को भी रूठ कर उस स्थान को त्यागने में वक़्त नहीं लगता।
इन घटनाओं के लिये भले प्रशासन को अपशब्द कह लें लेकिन हमारे हिसाब से तो सारी समस्या की जड़ पलामूवासी खुद हैं। हजार दस हजार के लिए ऐसे तुच्छ कृत्य कर के पूरे क्षेत्र की इज्जत मिट्टी में मिला रहे हैं और भविष्य के विकास समृद्धि की उम्मीद को अंधेरे में धकेल रहे हैं। हम बहुत उम्मीद के साथ आप सब से विनती कर रहे हैं - कृपया सोचिए। ऐसी घटना को अन्जाम देने वाले हमारे गाँव घर के ही लोग हैं, उन्हें समझाइए, रोकिए अन्यथा सजा दिलवाइये। अन्यथा खुद की पैर पर कुल्हाड़ी चलाते हुए भयंकर दुष्परिणाम भोगने के लिए तैयार रहिए।
लूटपाट की घटनाओं की खबरों के लिंक्स आपको नीचे कमेंट बॉक्स में मिल जाएंगे। पढ़ें और बाकियों को भी सावधान करें। अपने बहुमूल्य अनुभव, सुझाव या विचार कमेंट करना ना भूलें।
© ठेठ पलामू
May be an image of car, road, sky and text that says "Highway Robbery Return of Dark Age for Palamu © ठेठ पलामू KES1RJ6328"

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