Wednesday, November 23, 2022

ओल के तरकारी

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ओल के तरकारी भात चाप के सुसुsइते जैरमवा, दूरा देन ओटा पर बइठ के घाम तापइत आपन दादा से पूछलक- ' ए हो दादा, गुलाबी बहु कहत हलथिन की दिवाली के रोज ओल के तरकारी ना खएला तो अगला जनम में छुछुंदर के घर में जनम होतवा, सचों में का हो.…! ’
‘ मर का जनि तो ‘ आपन चवन्निया मुस्कान बिखेरइत दादा कलथिन।
‘अहो दादा…! अच्छा इ बतावा कि दशहरा चाहे दिवाली में सबके घर ओले के तरकारी काहे बनहsवा’ मने ओल के तरकारी का खएलक जैरमवा, ओकर सब सेन्स ऑर्गन एक्टिवेट हो गेल।
ओकर जिज्ञाषा शांत करइत दादा अस्थिराहे कहलथिं - ‘ ए हो बाबू…, ढ़ेर तो हम ना जानsहिवा, बाकि सुख-समृद्धि आउ धन-दौलत के बरsकत घर में सदा बनल रहे एही से दिवाली मनवल जाला। अब दिवाली से ओल के जोड़ के अइसे देखल जाला कि एक बार ओल लगा देला पर, हर साल अपने आप हो जाला, एकर जड़ पूरा कहिनो ना निकले, इन साल कोड़ लेला तबो अगला साल अपने हो जातवा। येही से सबनि इहे चाह हत कि सुख-समृद्धि आउ धन-दौलत आपन घर में कहिनो ना ख़तम होखे, जैसे की ओल ’
पहिले पब्लिक घर के बगान में, चाहे पाखा तर या घोरानी में ओल लगाता था; आजकल तो एकर व्यवसायिक खेती भी होने लगा है।
बाकी एगो इहो कहावत है कि- ओल मुँह छोल, अब बढ़िया नहीं बनेगा तो इहे न कहियेगा। वैसे अगर देहाती ओल ठीक से नहीं बना न…, तो खएला के बाद आपका तुरंत माईलेज बढ़ जायेगा। इहे से तनी खटाई या सिरका डाल के अस्थिरहे बनाइये और प्रेम से भात साथे खाइये। नहीं.. नहीं.. दाल काहे बनाना है; अइसहु एकर तरकारी मीट के फेल कर देता है ।
बड़ी लोग मुँह रब-रबाने के डर से हाईब्रीड (मद्रासी) ओल ले आता है, बाकि उ आलू तरी लगता है जी, उसमे देहाती वाला मज़ा नहीं आएगा। हमनी जेकरा ओल कहते है, कई जगह पर इसको जिमीकंद या सुरन भी कहल जाता है। बड़ी पौस्टिक तरकारी है या यूँ कहे की एक बहुमूल्य जड़ी-बूटी है। इसमें घुलनशील फाइबर, विटामिन-सी, विटामिन-बी6, विटामिन-बी1 और फोलिक एसिड तो रहबे करता है साथ में पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और फॉस्फोरस भी ठूस-ठूस के भरल रहता है। ओल एंटी-इंफ्लेमेटरी जो हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है, नहीं तो बीमारी हर थोड़े समय के बाद दस्तक देते रहेगा और एंटी-ऑक्सीडेंट मने शरीर के कोशिकाओं को खराब होवे से बचाता हैं, इससे कैंसर, उम्र के बढ़ने व अन्य रोग होने से हमारा बचाव होता है जैसे गुणों से भरपूर होता है और ये कई तरह की दिक्कतों को कम करने में मदद करता है। मने इ जड़ वाला तरकारी पोषक तत्व का पावर-हाउस हैं और एक सयंमित मात्रा में ओल खाए से ढ़ेर फायदा है।
तो फिर देर कउन बात के जाड़ा के मौसम हइये है, केकरो घर के पाखा या घोरानी से एकाद किलों के ओल कोड़िये, आउ नहीं तो बाजारे से ले आइये, फिर तरकारी… चाहे चोखा… या फिर पकौड़ी ही बना के खाइये, कसम से बड़ी आनंद आएगा। एक बिनती और इससे जुड़ी यादें और बातों को साझा करना मत भूलियेगा।
© अवनीश प्रकाश
May be an image of 1 person and text that says "'देहाती ओल' की तरकारी © अवनीश प्रकाश"

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