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घर में छोटकी बहिन से फोन पर बतियात हली तो पूछे लागल कि - "आंय भईया! तोहनी के गरमी छुटटी कब होतऊ?" अब ओकरा के बतावे कि इहाँ गरमी छुट्टी होना तो दूर, सोंचलो पर सैलरी कटे के चांस रहेला!
छुट्टी तो आपन बचपन मे होइत रहे, पूरा 1 महीना जम के। एके हफ़्ता में फूल स्पीड से पूरा महीना भर के होम वर्क ख़त्म! अगर पढ़ाई के ई स्पीड 6 महीना भी रह जईतक न तो कसम से गाँधी डिवीजन के नौबत ना अइते हलक क्लास में। पढ़ाई से नीमरला के बाद तो फिर केतनो लहर चलो, केतनो गरमी पड़ो हमिन के काहे ला जे नींद लगे। सब के सुतला पर निकल जइती आम तर। ओकरो से मन न भरे तो आउ दूर घूमता वाला (उहां रोड घूमावदार बा, इहे ला ई नाम) जामुन तर। उहंउ ना तो बेंगी पर (बेंग ढेरे रह हथीन इहां) मिसिर जी के खेत में पंप चले तो ओकर में नहाए चल जइते हली। माजा भी आव हलक पूरा। लेकिन उ मजा के खराब कर देलक एगो नाम- '#मुड़कटवा'
घरे-बहरे सब जगह हाला हो गेल हलक कि सब लइकन-चेंगन के संभाल के रखअ, मुड़कटवा चलल बा। अब हमीन लइका जात के डर से जादे तो ई जाने के अकबकी हलक कि ससुरा मुड़कटवा होला कइसन? कोई कहे कि लइकन के उठा के ले जाला! तो कोई कहे कि नाह, खाली मुड़ीये काटे ला! अब बाकी के टेंसन अलगे, आउ हमीन के टेंसन अलगे।
अब मान लेली कि दू गो लइका के पकड़िये लेलक, तो अकेले ले के जाइ तो कइसे जाइ? तो कोई कह देतक डेरावेला भी कि बड़का बोरा में भर के लेगअ हथीन हो! कोइ कहलक कि मलाईबरफ लेमचुस दे के ठग लेव हथीन पहिले फिर बेहोश कर के ले जा हथीन! एगो कहलक कि घर में प्याज रोटी मांगे आव हथिन आउ माइ जइसहीं भीतरे जइहें प्याज लावे, उ लइका चोरा के गायब।
अब हमीन हली तो लइके न! घरे अइते बड़का बोरा जुगाड़ कर के ओकर में घुस के देखती कि मने सही में ओकर में भर के लेजल जा सकेला कि ना। फिर आपस मे जे बड़का लइका हलक ओकरा से पीठ पर बैठ के कहती कि चल तो कुछ दूर हो! अब बचपन से ही हम तनी गोल-मटोल हइये हलीर, हराम जे लइकन दू से चार कदम हमरा लाद के चले परतन। अब हमीन के एतना प्रयोग से ई तो साबित हो गेल हलक कि हमरा टांग के लेजहूं ला मुश्किल बा आउ बोरा में भरबो मुश्किले बा। अब हमीन के दिमाग मे थोड़े ई बात हलक कि अगर उ मुड़कटवा के ग्रुप भी हो सकेला! 2-3 गो आदमी मिल के भी मुड़ कटवा हो सक हथ?
जइसन बतावल गेल हलक, हमनी बस अंगुलीमाल डाकू वाला इमेज बना के रेडी हली, कि उहे टाइप से कोई होइ देखे में कूचु-कुचु करिया। हाथ मे तलवार, साथ मे बोरा आउ एक दु ठो काटल मुड़ीयो! अब अपराधी के इमेज सब लइकन के दिमाग मे बन गइल रहे। बूतरू गैंग सब मिल के इहे रिजल्ट पर पहुँचली कि अब अकेले कोई लइका कहूँ आम चुने ना जाई। जब भी जाये तो कमसे कम तीन चार के टीम बना के। काहे कि एगो से ज्यादे तो मुड़कटवा के बोरा में अंटबे ना करी। तो ग्रुप में रहला पर बेचारा चाह के भी नइं लेगे पारी।
ओकर अलावे जब भी खेत तरफ लोटो लेके जइती तो पैंट के पाकिट में चोंख-चोंख पथल कम-से-कम तीन चार गो। सब के हाथ में बढियां बांस के मजगर लेबदा ताकि आम भी जादे झराये आउ जरूरत पड़ला पर मुड़कटवा के तलवार से भी लड़े पारे। दिमाग में रामायण के देवासूर संग्राम जीवंत हो गेलक। जबला युद्ध के तैयारी हो गेल तब तक सब हल्ला गुल्ला भी कम हो गेल हलक।
(सब के बता देउं कि उ घरी बड़ा बड़ा पुल ई सब बने में नर बली के बड़ा हल्ला रहे, अउर ओकरे चलते कै जगह बच्चा चोर पकड़ाईलो हलन। इहे से घरे वलन हमीन के मुड़कटवा के नाम से डरवईले हलन। एक बार तो एगो आदमी के मुड़कटवा समझ के सब खूब कूट देलन ट्रेन में काहे कि ओकर पास एगो बोरा रहे जेकर में मुड़ी होखे के शक रहे! बाद में पता होइलक कि बेचारा तरबूज बेचे जाइत हलक। हालांकि अभीयो झारखंड में कई जगह ई अमानवीय जघन्य परंपरा जिंदा बा, हाले में पुलिस छापामारी करले रहे!)
हाला कम हो गेल रहे तो मन में डर भी कम होए लागल। अब जीभ नाचे लगल फिर से कि बेंगी पर बलदेव सिंह के पेड़ पर बड़ी बड़का आम। उनकर गःड़ासा के पहरा के चलते बड़कन के तो हिम्मते ना पड़ हलक जे उ सोचबो करतन उ आम तोड़े ला।लेकिन अब हमनी के खुराफाती दिमाग के इसे रोकल जाव! हमिन पहुँच गेली पेड़ तर आउ का। एगो लइका चढ़ल उपरे आउ तोड़-तोड़ के गिरावे लागल। हमनी तीन गो चुने वाला। 20-25 गो आम चुनले होइब कि ओने से दू गो आदमी के रास्ता में आवईत देखली।
लमहर दाढ़ी, जटाधारी बाल, बगल में झोला, एकदम अजनबी विचित्र! तानी दुरे में हली हमिन चिनहे के कोशिश में, अब के हो सकेला ई? तबतक एगो कह देलक कि 'मुड़कटवा'! अब ई सुनला भर के देर कि सब युद्ध के प्लानिंग गइल तेल बेचे। जे उहां से दउड़ेला शुरू करली, जबतक अहरि (अहरा के मेहरारू, नन्हे गो के तालाब) के पींड़ी पार ना हो गइली, तबतक पीछे मुड़ के देखबो ना करली। जब ढेर दूर पहुंच के देखली कि अभियो दुनो अइते हथ तब सब आपन आपन घरे पैक! जा के जे मुड़ी जांत के सुतली से दू घण्टा तक हराम जे सुगबुगइबो करुं।
बेर डूबला पर उठली तो दूरा पर केकरो गावे के आवाज़ सुनली। माई के पीछे-पीछेे गेली देखे कि के बा? तो का देखाइत ही कि उहे दुनो मुड़कटवन एकदम इत्मीनान से सारंगी बजा बजा के गीत गाइत हथ। बाद में पाता चलल कि उ दुनो तो जोगी हलन, जे अइसही गा गा के भीख मांगे आव हलन।
राउरिनो जरुर मुड़ कटवा के बारे में कुछ न कुछ हाला सुनले होइब! कमेंट बॉक्स में जरूर बताऊँ।
© Anand Keshaw

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