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ठीक 22 साल पुरानी कटिंग है ये। अंग्रेजी नहीं, भारतीय महीने के अनुसार। डालटनगंज में रामनवमी के दिन जुलूस पर बिजली का तार गिरा था। कोई तीसेक लोगों की जिंदगी खत्म हो गई थी। देर रात की घटना थी इसकी वजह से खबर केवल राष्ट्रीय नवीन मेल में छपी थी।
दूसरे दिन प्रेस पहुंचते ही संपादक वेद प्रकाश वाजपेयी जी ने कहा कि आज फर्स्ट पेज का बाटम सुमन जी लिखेंगे। मैं जनरल डेस्क का प्रभारी था। मेरा जवाब था कि मैंने न तो कुछ नोट किया है न ही कोई फोटोग्राफर मेरे साथ था। हां, मैंने रिपोर्टिंग के साथियों को शहर में घूमते हुए कुछ स्टोरी एंगल जरूर दिए थे। इस पर वेद जी ने कहा कि आपने जो देखा वही लिख दीजिए। अगले दिन यह रिपोर्ट और राकेश सहाय की रिपोर्ट सबसे चर्चा में रही।
यह राष्ट्रीय नवीन मेल में मेरी आखिरी बाइलाइन थी। मई में मेरा चयन अमर उजाला, जालंधर में हो गया। अभी भी इसी अखबार में नोएडा में हूं। वेद जी और इस रिपोर्ट में जिस पत्रकार वासुदेव तिवारी का जिक्र है इस दुनिया में नहीं है। पिछले 25 मार्च को वेद जी की 18 वीं पुण्यतिथि थी। उनकी और तिवारी जी की कमी पलामू के पत्रकारिता जगत को सदैव खलती है।
मुझे भी डालटनगंज छोड़े करीब 20 साल होने जा रहे हैं। अभी कोरोना संकट में कई यादें ताजा हो रही हैं। एक बैग मिला उससे कुछ पुरानी यादें निकली। काफी कुछ तो अभी भी डालटनगंज में ही है। सोंचता हूं उन्हें भी अपने पास ले आऊं पर घर की चीजों को फ्लैट में लाना संभव है क्या...
©प्रभात मिश्रा सुमन
वरिष्ठ पत्रकार, अमर उजाला नोएडा

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