Monday, April 4, 2022

लातेहार: 4 अप्रैल जिला स्थापना दिवस


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आज स्थापना दिवस है लातेहार का। पलामू जिले से यह भले ही 21 साल पहले अलग हो गया पर 'पलामू' से कभी अलग नहीं हो सकता। 'पालामो' यात्रा वृतांत है संजीव चट्टोपाध्याय का। जिस पलामू का जिक्र उन्होंने किया है वह आज का लातेहार जिला ही है। वह 1880 के आसपास वह पलामू में तैनात थे और यह यात्रा वृतांत उसी समय का है। संजीव चट्टोपाध्याय राष्ट्रीय गीत 'वंदेमातरम' के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के भाई थे।
वह लिखते हैं, 'पलामू में प्रवेश करते ही मैंने देखा कि नदी भी हैं, गांव भी हैं। पलामू परगने में अनगिनत पहाड़ हैं। पहाड़ों के ऊपर पहाड़ फिर पहाड़। ऐसा ही एक पहाड़ लातेहार गांव के पास भी था।'
संजीव बाबू की किताब के एक अध्याय का नाम ही 'लातेहार की पहाड़ी' है। वह लिखते हैं, 'लातेहार पहाड़ की बात मैंने पहले एक बार की है। फिर से उसकी बात कहने में मुझे खुशी हो रही है। पुरानी बातें करने में बड़ा मजा आता है। मैं हर रोज लातेहार पहाड़ी की गोद में जाकर बैठता था। तंबू में हजारों काम रहे, फिर भी मैं उन्हें टाल जाता था। चार बजे नहीं कि मेरे अंदर एक बेचैनी जागती। पर, ऐसा क्यों, मैंने कभी सोचा नहीं। पहाड़ पर कुछ भी नया नहीं, किसी से मुलाकात की गुंजाइश नहीं, किसी से गपशप की आशा नहीं फिर भी पता नहीं क्यों मुझे वहां जाना निहायत जरूरी लगता है।'
लातेहार के पहाड़ हैं ही ऐसे कि आज भी ये लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। हर कोई इनकी तरफ आकर्षित होकर खींचा चला जाता है। लातेहार जिले में ही 'नया और पुराना पलामू किला' है। ये भी पहाड़ों पर ही हैं। ये भी लुभाते हैं, गर्व का भान कराते हैं। इनके पुनरुद्धार की योजना बनी है। लातेहार जिले के स्थापना के दिन यह शपथ लेने की जरूरत है कि इसे किले की भव्यता बरकरार रखा जाए। यहां के निवासियों के साथ मिलकर जिला और राज्य प्रशासन इसे साकार करने में सफल हो।
लातेहार और पलामूवासियों को शुभकामनाएं।
©प्रभात मिश्रा सुमन
वरिष्ठ पत्रकार अमर उजाला नोयडा
May be an image of text that says "लातेहार की पहाड़ी পালামৌ সঞ্জীবচন্দ্র চট্টোপাধ্যায় पहाड़ की बात मैंने पहले एक बार की है| मुझे खुशी हो रही है। पुरानी बातें कहने में बड़ा अब जब मुझे सुनने वाले मिले हैं तीन-चार गों ने, मानो वे भी शीप्र ही अपनी बातें व मेरा लिखा पलामू भ्रमण वृत्तांत पढ़ा है फिर प्रशंसा बढ़़ती जा रही है| आप प्रशंसा करें या नपनी पुरानी बातें सुनाएंगे इस प्रकार से पुरा 1 जवची है पर मेरी कहानी से कि समाहरणालय समाहरणालय मलेजार"

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