Monday, July 2, 2018

ठेठ पलमुवा लभ स्टोरी

ठेठ पलामू के पाठकगण के नमस्कार! रउईन अभी तक लभ स्टोरी के पहला भाग में पढली कि सुषमा और पुटेसर एगो बारात में मिललन, प्यार आगे बढ़ल, लेकिन जब पुटेसर पढाई में व्यस्त होइल हलन तो सुषमा के बियाह हो गेल. ढेर दिन बाद जब पुटेसर सिंगरा गेल रहे तो उहाँ सुषमा आपन दुनो लईकन के पुटेसर से मिलवईलक ई कह के कि बाबु देखो ई तुम्हारे मामा हैं. दोसरका भाग में हमिन पढली सोनू और सोनम के प्रेम कहानी. ई कहानी तो कुंदरी से डाल्टनगंज के बस में सफ़र करते-करते जवान होइलक लेकिन नक्सल हिंसा के शिकार में तबाह हो गेल. सोनू के बड़ी मार पडल, उ गाँव छोड़ के पंजाब भाग गेल कमाए. कुछ दिन पाहिले गुमटी पर दुनो फिर से भेंटईलन तो सोनू भी सोनम के बच्चा के मामा बनावल गेल. दुनो कहानी डिटेल में पढ़े ला ठेठ पलामू के पुराना पोस्ट में जाऊं, चाहे हमर ब्लॉग पर भी साथ में पढ़ सक ही. कमेंट बॉक्स में लिंक डाल देवल जाई. अब आगे के कहानी पढ़ल जाव...

*  *   *  *
डाल्टनगंज के अस्पताल में सुषमा अकेलहीं आपन दूसरा बच्चा के 9 महिना पुरला पर मीजल्स के टिका लगवावे आइल रहे. जब बच्चा के नाम से पर्ची कटवावे के बारी अईलक तो उ बच्चा के नाम ‘पुटेसर कुमार’ बता देलक, आपन प्रेमी के नाम पर. उ कोई भी तरीका से आपन प्रेम कहानी के याद जिन्दा रखे ला चाहत हलक. फिर आपन बारी के इन्तेजार में उ बरामदा में गेलक जहाँ उ आपन झोला-बैग एगो कुर्सी पर रख के सीट छेंक के आइल हलक. उहाँ गेला पर देखलक कि ओकर जगह पर दोसर बच्चा बैठल बा. आव देखलक न ताव, हुमच के दोसर के सामान फेंक देलक, आऊ धडाम से अपने बैठ गेलक. पीछे से दोसरका के माई देखलक, तो पितपिती में देहाती गारी 90 के स्पीड में स्टार्ट कर देलक. होलक तमाशा शुरू! भीड़ जुटे लगलक. सुषमा भी अंचरा ओढ़ के आपन बेटा के दूध पियावे में लागल-लागल दोसरकी के कौनो करम न बाकि रखलक. नैया नतीजा करे पर तुलन हलन दुनो.

उ लेडिज कहलक- “जानते हो हमरा? कुन्दरी के हैं हम. भुन्जरी नियर भूंज देंगे. अगे बोरसीभरोनी! कहाँ घर हउ गे तोहर?” 
“मुंहजरी नइ तो! कहिनो शहर के मुंह देखले हे गे, जे मोटरी ले के अस्पताल आइल हे? देख हम बेग लेके आइल ही. सिंगरा घर बा हमार, आऊ हमार भाई आजे कुन्दरी गेल बा हित घर. डेराइत हियऊ का तोहरा से हम? आऊ ई अस्पतालवो में हमार जीजाजी कम्पाउण्डर के काम कर हथिन. सूअरमुंही, आगलगौनी...!”
“का कहले? तोहर जीजाजी? हमरो एगो जीजाजी तो यहीं काम कर हथ, उनको ससुरारी सिंगरा हई! का नाम हउ तोर बपई के गे? घरे पहुँच के गईया-गत करवा देबउ...!”
“कुन्दरी में हमरो एगो मौसेरी बहिन बा. ढेर साल हो गेलक ओकर से मिलला, कम से कम 15 साल तो जरुरे. अब तो बियाह हो गेल होतई ओकर, सास के तो पानीये पिया के रखले होई उ! तोरो से जादे लडाकिन-पझाठीन बा उ गे... तोर कपार के सब बार नोच लेई हमार सोनमवा, कहे दे ओकरा से ...!”

ई नाम सुनते दोसरकी औरत चुप हो गेलक, एक्दम हक्का बक्का! सुषमा सोचे लगलक कि कही ज्यादा तारीफ तो ना न कर देली आपन बहिन के, कोई सुनले होई तो का सोंची. काजनि ओकर ससुरा के कोनो होइहन तो का बोलिहन? उहो लजाइल नीचे मुड़ी गडले ‘पुटेसर कुमार’ के दूध पियावे में ध्यान देवे लगलक, आऊ बगल वाला एगो कुर्सी खली कर देलक. थोड़ी देर में दोसरकी औरत आपन 3 साल के लईका के ले के ओकर बगल में आके बैठ गेलक आऊ धीरे से पुछलक. “सुनिए न! आपका नाम सुषमा है का?”
“हाँ! लगता है हम भी ज्यादा बोल दिए. का कीजियेगा गोस्सा में बोला गया.”

इतना सुनते के साथ दोसरकी खटक से उठ गेलक आपन कुर्सी से और एक मुक्का लगईलक अहिंच के पीठ पर. कुछ बुझहीं ना पारलक सुषमा. तब तक अगल बगल वाला भी उठ के जमा होवे लगलन कि अब तो लगईत बा कि झोंटाझोंटी होइए जाई. तब तक ले दोसरकी औरत चिल्ला के कहलक –“अगे सुषुम! ई तू ही हले गे? हम हीं हियऊ सोनमवा...”

ई सुनते के साथ सुषमा भी मारे अचरज के उठ गेलक आऊ ठहाका मार के कहे लगलक– “हाईहो दादा! ई तू हले गे सोनम! तबे तो हम कही की कुन्दरी में इतना लडाकिन दोसर कोण हो गेलक. ढेर दिन हो गेल हलक गे, मिले ला मन बनवते हली, लेकिन ई न सोचले हली की तोर से इतना दिन बाद मिलब तो ई विधि से.”

कहते कहते भर में दुनो के आँख भर गेल. दुनो एक दूसरा के अंकवार लेलन आऊ उहाँई जोर जोर से भेंट काढ के रोये लगलन. अगल बगल वालन के बैठल बैठल भरपूर मनोरंजन हो गेल हलक. तब तक अस्पताल के कम्पाउण्डर साहेब ओने से अइलन दू प्लेट सिंघाड़ा छोला लेके.

“अरे! आप लोग एने आ गए. हम कने कने खोज रहे थे दुनो के...."

*  *  *  *

नर्स आ के उ सब से ‘बच्चा के बाप के नाम’ पूछइत हलक. तो तुरंत सोनमवा अपन बड़का बेटा के आवाज़ देलक- “अरे सोनुआ! पापा के नाम बता देहि तो... सिस्टरनी जी! हम कैसे मरद के नाम धरेंगे?” ओइसही सुषमा कान पकड़ के कहलक अपन बेटा से- “छोटन! बोलत काहे नइखे रे? बकार नखउ खुलत का? घरे तो ढेर चीचीयाइत रह हे, बोल आपन बपई के नाम..” 

नर्स के जइते के साथ दुनो एक दूसरा से पूछे लगलन कि बेटा के नाम अइसन काहे? काहे कि सोनम के तो पता रहे सुषुम और पुटेसर के प्रेम कहानी. तो सुषुम बतैलक कि उ पुटेसर के याद जिन्दा रखे के ख्याल से आपन छोट बेटा के नाम ओकरे नाम पर रखले बा. ई बात पर सोनम भी लजाइल तरी मुंह बना के कहलक कि इहे खातिर उ भी आपन बेटा के नाम ‘सोनू कुमार’ रखले बाहिन. फिर सोनम धीरे धीरे आपन और सोनू के बिच के सब कथा-कहानी-कांड के वर्णन कर देलक सुषमा से. दुनो के स्थिति कमोबेश एके नियर रहे. मजेदार बात ई कि दुनो आपन-आपन प्रेमी से कुछ दिन पाहिले मिलल हलन तो आपन बचवन के कहले हलन कि ई देख, तोर मामा लागअ हथुन! लेकिन सोनम के मन में कुलबुली होखे लागल, ढेर देरी बर्दाश्त करला के बाद उ पूछिये देलक- “लेकिन ई बड़का छौंड़ा के नाम ‘छोटन’ काहे रखले हहीं गे?” तब सुषमा शरमा गेलक आऊ एने ओने देखला के बाद कहलक कि छोटन तो ओकर बड़का जीजाजी के भाई के नाम हलक न! इतना सुनते के साथ सोनमवा के मुस्की छूटे लागल, जे चवानिया मुस्कान देते हुए उ कहे लागल- “ बड़की खिलाडी निकलले तू तो गे! छोड़ आगे कुछ मत कह, हम सब समझ गेली..."

* * * *

“बड़ी दिन बाद मिलले गे सुषमा बहिन! एकदम तनको इयाद न पडलऊ हमार? हमर बियाहो घरी ना आइल हले?”

“अगे का कहिओ बहिन! बियाह होइते घर-दुआर, सास-ससुर, मरद-बाल-बच्चा. इहे सबके झंझट में अइसन बाझलिअऊ कि जिंदग़ी एकदम नरक हो गेलउ। बियाह घरी तोहर ‘छोटना’ न पेट मे हलई, तो कैसे अइतिउ जे? एकर बाउजी कहले हलथुन कि ईहाँई ससुरारिये में रह जो, माई बहिन हइये न हथुन सेवा ला! हम कह देले हलीआई कि हमरा से न होई, डाक्टर कहले हथ बेड रेस्ट ला। लड़ झगड़ के घरे आ गेल रही। अब तूंही बोल ना कि कोन लरकोरी जनाना दुनो मुंहझौसी सास-ननदि के बना-बना के खिअईतक? उपर से दिन भर में बीस बार टोकेला अलगे से कि आइसे मत कर, ई मत खा, एने मत जो, ओने मत निकल, माथा से अंचरा काहे ढलक गेलऊ. माने आजिज आजिज कर देले हलथुन दुनो मिल के! रोज-रोज के रकरक से बढ़िया घरे आ गेल हलीअउ. अउर जब तक बाबू डेढ़ साल के न हो गेल हलइ, नहिये गेल हलीअउ. अच्छा! छोड़ उ सब बात! तू बताओ आपन.”

“अरे का बतईआउ? हमरो उहे गति हऊ जे तोहर. सोनुआ के पापा रह हथुन दिल्ली में. साल-दु-साल में कभी-कभार आव हथुन. अब घर-बार के पूरा जिम्मा हमरे पर हऊ. कहीं एको दिन ला जाइब गरह हऊ. तोहर तो ससुरा ठीक जगह पर हऊ, ‘तरहँसी’ आवे जाए में दिक्कत ना होईत होतउ. हमर तो ‘धमधमवा’ न हऊ. पोलपोल से उतर के ढेर दूर पैदल चले पड़ हऊ. का करबे, ई शादी बियाह हो के जिंदगी तबाह हो गइल! केतना बढिया उ जमाना रहे जे हमीन खुला चिड़िया हली, जहाँ मन जा आव हली, कोई रोक टोक ना रहे...”

“हाँ गे सोनम! ठीके कहैत हे. अच्छा! बाबु के नाम रखे घरी कैसनो ना लागलउ?”

“का करबे बहिन! अब कम-से-कम नाम के बहाने याद तो पड़ न जायेला उनकर. एकर पापा से तो लड़ाई हो गेल हलइ नाम रखे घरी. दू दिन खाना-पीना छोड़ देलीअउ, तब जा के मानहिंला पडलई.”

“हमरो जमाना रहे गे! का मजा से बस में साथे जाइत रही. रोज़-रोज उ हमर ला नया-नया शायरी इयाद कर के सुनाव हलन. बड़ी हंसावत रहन. लेकिन भउजी के काजन का मत सवार होइल रहे कि भैया के बता देलन?”

“आंय गे सोनामवा! तो तू कइसे बरदास्त कर लेले हले आपन आँख के सामने उनका पिटाइत गे?”

“अरे का करति? भैया कहले हलक कि अगर रोइबे तो उनकर मुड़ी काट दिहें पार्टी वालन सब. चुपचाप रहबे तो ऐसे खाली पीटीए के छोड़ दिहें. हम तो घरे आइते के साथ आपन हाथ के नस काट लेले रही, अभियो तक दाग बा. एहि से भर हाथ चूड़ी पहनें पड़ेला अभियो.”

“हमरो कष्ट के किस्सा जान ले सोनम! हम एक दिन परवचन सुने गइल हली. ओकरा में सुनली कि सेनुर लगवे से मरद के उमर बढेला. बस काजनी का धून सवार हो गेलक हमार कपार पर. उ घरी हम पुटेसर के आपन सबकुछ मनबे करअ हली, से रात के भर कपार सेनुर लगा लेले हली. अब माई देखलक से राते में बड़ी मार. उ माघ महीना में राते में मुड़ मइसवा देले हलक.”

“लेकिन कुछु कह सुषमा! हम तो अभियो आपन सोनू के बड़ी प्यार कर ही. अब तो उ बस में कंडक्टर बन गेल हथ, लेकिन अभियो ले बियाह नैखन करले. अबरी सोचले ही कि उहे जेपीएस बस से नइहर जाइब, कमसे कम एक घण्टा उनकर साथ रहे के मौका तो मिली!”

“ठीके कहले बहिन! केतनो एकर पापा कमा के पैसा दे देवथ, लेकिन हमर पुटेसर वाला प्यार ना देवे परिहन. हमहुँ सुनली बुटन जीजाजी से कि कमा के उहो टेम्पू खरीदले हथ. लेकिन कौनो दिन मिलथ तब न उनका बतइति कि हमहू उनका से ओतने प्यार कर ही अभियो.”

फिर दुनो आपन आपन मोबाइल निकाल के एक दोसरा के घर-परिवार, नैहर-ससुरा के फोटो देखावे लगलन. सुषमा देखावे लगलक कि- “देख न हमार ससुरारी के एगो व्हाट्सप ग्रूप बनल हउ. सब रोज-रोज मेसेज डालतथुन कि पतिव्रता स्त्री के महत्व. आऊ काजनी कने कने से एगो विडियो लान के भेज देताथुन जेकर में एगो पुतोह आपन सास के खूब लाते-जुत्ता करैत रहे. हमरा बुझायेला ना का कि ई सब हमरे पर टोंट मारे के उपाय बा. लेकिन हमहूँ चुप न रहियई, फॉरवर्ड कर देव हियई मेसेज कि सास भी कभी बहु थी..”

“हमरो ग्रूप में ऐसहीं सब ससुरा वालन भरल हथुन. रोज केकरो-केकरो जन्मदिन मनावल जाला ग्रूप में, अब हमरा केकरा केकरा से लस-भूसा होखो? हम काहे ला सब के बधाई देवल करूँ, हमार नैहर के ग्रूप बने दे, बनाव तो अभिये एगो हमिन के अलगे ग्रूप, हमरिनो ओकरे में खेलइत रहब. ढेर परिवार के प्यार देखावैत रह हथ न उ सब, अब हमहूँ देखाइब उ सब के..”

तखनिए सुषमा के मोबाइल में फेसबुक खुल गेलक, आऊ ठेठ-पलामू के पेज पर देखलक कि दू गो प्रेम कहानी बड़ी हिट होइल बा. दुनो मिल के पढ़े लगलन, पढ़ते पढ़ते भर में दुनो के पसीना छुट गेल, ई तो उहे सब के बेवफाई के कहानी बा. का समझिहें सब उ सब के बारे में?

सोनम मने-मन सोचे लगलक, ओकर का गलती रहे? सोनू के भी गलती नइखे, बेचारा के तो में कहानी पते नइखे. उ तो हमरा बेवफा समझबे न करी, लेकिन उ भी आपन पक्ष जरुर लिख के भेजी ठेठ पलामू में, तबे लोग नोट में लिखेला छोड़ीहें कि ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’.

“सोनम बेवफा नहीं है....”. ओकर मुंह से जोर से निकल गेलक.

“का होलउ गे? काहे ला चिल्लय लागले? हम जानइत हियाऊ तोर दिल के दर्द, हमरो दिल के दर्द उहे बा. देख हम तोर ला एगो गाना खोजले हियाऊ यु ट्यूब से, ई गाना के साथ तू ठेठ पलामू के पोस्ट में जा के कमेन्ट कर दे, लिख दे आपन दिल के बात, आखिर दुनिया के जाने ला चाही न की लड़की के बियाह ओकर मर्जी से ना होखे परलक तो एकर मतलब ई नइखे कि उ बेवफा बा.”

दुनो मिल विडियो देखे लगलन आऊ सोनम गुनगुनाये लगलक साथे-साथे -

“सोनू! तोहरा हमरा पे भरोसा काहे नइखे?
सोनम के दुनिया बोले ला बेवफा.
लेकिन सोनम साबित कर देई हर दफा.
हमरा ससुरारी बा पोलपोल,
सोनू हमरा से प्यारी बातें बोलबोल
सोनू! तोहरा हमरा पे भरोसा काहे नइखे?”

बच्चा के टिका दिया के दुनो जाय लगलन तो सुषमा कहलक- “चल बहिन! बड़ी देर हो गइल गे ई अस्पताल के चक्कर मे. अब फ़ोन करीहें तो बतिआइल जाई. ओइसे भी आज के जमाना में हमनी के दर्द समझेला कहाँ कोई तैयार बा. काजनी ठेठ पलामू चलावे ओलन हमिन के कहानी छापबो करिहन कि ना? अगर छापियो दिहन तो पब्लिक लमहर समझ के ना पढ़ीहन ई कहानी तो सोनू और पुटेसर तक हमिन के बात पहुंचबो न करी..”

“ना गे दीदी! पलामू में जरुर कोई न कोई अइसन दिलदार होइहन जे हमिन के दर्द समझिहन, उ सब जरुर ई कहानी के शेयर करिहन, भगवन उ सब के प्रेम कहानी जरुर पूरा करिहन, उ सब हमिन जैसन ना तड़पीहन, लेकिन जे ना पढ़ी न , उ सब के भगवान अइसन हाल करिहन न कि उनकर लभर दोसर साथै भाग जाई..”

© ठेठ पलामू के टीम

1 comment:

  1. सब के सलाम आउ परनाम ।
    पुलमूवां भासा में इ काथा काहानी पढ़ के मन जुड़ा गईल ।
    धन्यवाद ।

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