आज बिहाने-बिहाने फ़ेसबुक खोलबे कइली कि देखइत ही एगो चाचा अपन घरे के लइकन के फ़ोटो डलले हथ। ओकर में एगो बा से घोड़ा बनल बा आउ दुसरका ओकर ऊपर बइठल बा। देखते बचपन इयाद पड़ गेल।
हमनियो के तो अइसने गाड़ी रह हलक। दू गो रहती तो घोड़ा बन के पारी-पारी से एक-दूसर के पीठ पर बईठ के आउ झूठो में मुँह से तरह-तरह के आवाज़ निकाल के गाड़ी चलावइत रहती। कुर्सी चाहे बेंच पर भी उल्टा बैठ के स्टेयरिंग हैंडल घुमावे के तो अलग ही मजा रहे। रस्सी के एक छोर के दूसरे छोर से बांध के ओकेरे में चार पांच गो घुस जा हली तो हो गेलक रेलगाड़ी तैयार। आउ जादे लइकन रहती तो बड़का बस बना के दौडाइते चलती। बगल से माई-चाची आ जइतन तो दुरे से होर्न भी बजा देते कि एक्सीडेंट न होवे। न कौनो लाइसेंस के जरूरत न कौनो परमिट के टेंसन, जहाँ मन करे अपन गाड़ी चला देती। आउ जब पेट्रोल ख़तम अपने गाड़ी बन के दुसरका के पीठ पर बैठा लेती। अब तो केतनो सचो के घोड़ा पर बईठल जाओ, चाहे बुलेट पर उ मजा कहा मिलेला।
आउ एगो खेल रहे। बड़कन सब सूत के आपन ठेहूना पर लटका के हमीन के झूला झूलाव हलन, साथे साथ इ गीत भी गाव हलन...
"घूघूआ मना उ पटी दाना"
अब ई गीत के मतलब केकरो पता होखो तो जरूर बतावल जाव! इंतजार बा...
©️Anand Keshaw
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