अगर आप पलामु से हैं और रांची में रहते हैं, तो मेरी आपबीती जरुर सुनिए। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा हुआ है, तो जरुर बताइये।
होशियार- का भाई! तुम पलामु से हो का?
मैं- हां भैया! पलामुवे से हैं। आप कइसे पहचाने?
होशियार- अरे यार! गढ़वा पलामु के लोग पहचना जाता है। सिधा होता है न! बुड़बक जैसा बात करेगा। सपना बड़ा-बड़ा देखता है। रांची आयेगा न तो IIT से नीचे तो सोचबे नहीं करता है। लड़की लोग से ऐसे दूर रहेगा कि मत बोलिए। बस यही सब लक्षण से पता चल जाता है कि पलामू का है। और भी बहुत सा बात है, कितना बतायें ?
मैं- हम्म...अच्छा मजाक उड़ा दिये भैया।
होशियार- अरे तुम तो अब रांची के न हो यार।
मैं- इसलिए अभी आप पलामु का बोले!
होशियार- हटा न यार, हो गया।
मै- नहीं। नहीं हुआ। और कुछ बोलना है तो बोल लीजिए। नहीं तो अब हम एक बात बोले भैया? सुनिए...
आप पलामू के जॉन-जॉन लइकन को बुड़बक समझते हैं ना, उ बुड़बक नहीं होता है। घर में
उसको समझाया जाता है सबसे इज्जत से बात करना। और सपना जानते हैं बड़ा क्युं देखता है? काहे कि बाप-माई का हाल जानता है। और उ जब मैट्रिक के बाद रांची आता है न, तो रात रात भर इंटरसिटी में जग कर आता है। जानते हैं भैया! ट्रेन एके गो है, उ भी खाली रतिये में, आउ ओकर में जगहो नहीं मिलता है।
माई कोठी से चाउर निकाल के बेच देती है, उ पैसा से पलामु के लइकन रांची में पढता है। हमलोग के यहां सुविधा नहीं है एतना, एही चलते रोज दुध-दही खाये वाला लइकन सब रांची के मेस वाला खनवा खाता है, लेकिन अधिकतर तो अपने बनाता है खाना डेरा में। आउ आपको पता है कि मेस वाला खनवा चमचम में डालल रहता है, ओकरा से भतवा भी ओही रंग के हो जाता है।
कोचिंग में सब पढ़ाई समझ में आता है पर अंग्रेजी के चलते खड़ा हो कर बोल नहीं पाता है। भैया बड़ी मेहनत से जीता है, इसलिए IIT सोचता है। और बात रहा लइकी से दूर रहे के, तो अइसन बात नहीं है कि पलामू के लइकन मरद नहीं है। पर उ जानता है कि इहां लइकी घुमायेंगे, तो माई-बाप के मेहनत का पैसा बर्बाद हो जायेगा। रिजल्ट एक बार भी खराब हो जायेगा तो पढ़े के मौका नहीं मिलेगा। आउ फिर पैसा भी तो चाहिए न इहां लइकी खातिर। सच बात एक और बोले? जेतना खूबसूरत खूबसूरत लइकी पलामू के खाली डाल्टनगंज में मिल जायेगी न ओतना... छोड़िए हम काहेला किसी को खराब बोले।
और एक बात! भले पलामू के लोग सीधा होता है, सबके भैया-भैया कहता है, काहे कि उसको लगता है कि अगला से प्यार से बात करेगा तो उहो इज्जत देगा, पर उ बुड़बक नहीं होता है और न ही कमजोर। अगर विश्वास नहीं है तो ध्यान से देख लीजिए।
आप जहां बैठ के पलामू वालन के मजाक उड़ा रहे हैं न, इ जमीन और एतना बढ़का बिल्डिंग पलामू के आदमी का है। आप अपना फेसबुक पर जो नेता के साथ फोटो लगायें हैं न, उ भी पलामू के हैं। पूरा रांची में पलामू के एतना आदमी है न सब अच्छे-अच्छे पद पर कि आप सोच भी नहीं सकते हैं।
जानते हैं? आपका बात पर हमको गुस्सा नहीं आया।क्योंकि हम जानते हैं कि पलामू के लोग मेहनती होते हैं । ऐसे तो मौका नहीं मिलता, पर जब मौका मिलता है तो सरकार हिला देते हैं। आउ आप अगर अपने आप को ज्यादा होशियार बुझ रहे हैं, तो सुन लीजिए। जेतना एरिया में आपका फ्लैट है न ओकरा से दोबरी में पलामू के लोग अपना गाय-भैंस के सारी रखते हैं।
आप जिनलोग को बुड़बक समझ रहे हैं ना उ सब अपना जिन्दगी बनाने के लिए चुपचाप आपका मजाक बर्दाश्त कर लेता है। नहीं तो पलामू का आदमी का दिमाग जब सनक जाता है न उस समय हाथ लगा के पटके में देऱो नहीं करता है। आपको समझा रहे हैं काहे कि आपको समझाना चाहे। आगे से कोई पलामू वाला को अइसे मत बोलिएगा। काहे कि सब सीधे नहीं होता है। कभी कहीं बहाली हो चाहे सरकारी परीक्षा आपको सबसे ज्यादा लइका पलामू का ही मिलेगा। आउर खाली जइबे नही करता है निकालने वाला भी सबसे ज्यादा पलामू का ही होता है। का समझे? हमारे रग रग में है ठेठ पलामू...
© K Vishwa
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