Thursday, September 15, 2022

भेंट का फूल

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पलामू के बच्चों को कमल का फूल सिर्फ किताबों में और दिवाल पर टंगे भगवान की तस्वीरों में देखने का ही सौभाग्य था। ऐसे ही एक दिन बाबूजी के साथ सड़क किनारे पानी में 'जल-कुमुदनी' के पुष्प को देख कर अनायास ही जिद कर बैठा कि मुझे 'कमल' का फूल चाहिए, तोड़ दीजिये। बाबूजी गंदे पानी में उतर कर फूल लाने के बजाए, मुझे ज्ञान देना ज्यादा उचित समझे - " बेटा ये #भेंट का फूल है, कमल नहीं है।" पूरे रास्ते उन्होंने अपना बायोलॉजी ज्ञान दिया कि कैसे कमल और वाटर-लिली में बहुत सारी डिफरेंसेज होती है।
थोड़ा बड़ा होने पे जब अपने मन का मालिक हुआ और दोस्तों के साथ साईकिल पे नए-नए रास्ते ढूंढने निकलने लगा, तो जब भी कहीं अहरा, पोखरा, खेत, तालाब में भेंट का फूल दिखता, तो हमारी पूरी टोली पानी में उतरने में देर नहीं लगाती। देखते-देखते हमारा टिड्डियों का दल पूरा का पूरा भेंट का फूल तोड़ कर आपस में बंटवारा करने में लग जाते थे। फिर भेंट के फूलों का ढेर साईकल के कैरियर पे लाद, हम बच्चे शान से ऐसे चलते थे, मानो कोई खजाना हाँथ लग गया हो। पूरे रास्ते लोग एकाध फूल मांगते रहते थे और हम दानी कर्ण बन अपनी उदारता में बांटते चलते थे, साथ में अपनी बहादुरी के किस्से सुनाना नहीं भूलते थे।
कुछ बच्चे फूल के नीचे की डंडी को मोड़-तोड़ कर माला बनाते थे, तो कुछ सारी पंखुड़ियों को नोच और नीचे की डंडी को छील कर चकरी। लेकिन असली मजा तो भेंट के फूल का 'बचका' खाने में आता था, जिसे आज कल की पीढ़ी 'पकौड़ी' के नाम से जानती है। चूंकि भेंट का फूल गंदे पानी में भी उगा रहता था, तो घर पर माताजी को विश्वास दिलाना जरा मुश्किल काम था कि फूल साफ पानी में से ही लाये हैं। तभी जाकर भेंट की पंखुड़ियों की अद्भुत सुस्वादिष्ट #बचका खाने को मिलता था। दरअसल खाने की थाली में उपस्थित सभी चीजें घर में पापा लाते थे, तो थाली में एक आइटम खुद का कमाया हुआ सा अलग गौरवान्वित करने वाला अहसास देता था।
उस वक़्त डाल्टनगंज में बरसात के बाद जगह-जगह पानी जमा होकर पोखर का रूप ले लेती थी और उन सब पोखरों में खिला भेंट का फूल, एक अलग ही रमणीय दृश्य बनाता था। ये एक तरह का जल संरक्षण का प्रकृति का अपना ही तरीका था। फिर शहरीकरण की दौड़ में डाल्टनगंज में जमीन की ऐसी लूट मची कि पानी जमना तो दूर तिल रखने की जगह भी नहीं बची।
अरे हाँ, बताना तो भूल ही गए। जब बहुत बाद में बड़ा होने पे असली कमल का फूल देखने को मिला तो मुँह से निकला "धुत्त बुड़बक, बहुत बेकार दिखता है ई तो, कइसन लुंजपुंज है ई कमल का फूल, एकर से तो हज़ार गुना सुंदर हमर पलामू के भेंट के फूल दिखता है।"
© सन्नी शुक्ला
May be an image of flower, outdoors and text that says "भेंट का फूल"

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