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प्रिय ठेठ पलामू के पाठक गण
इसे महज संयोग कहे या फिर मेहनत व जुनून का प्रतिफल कहें कि डालटनगंज(पलामू,झारखंड) से दो युवा पिंकू दुबे (लेखक/निर्देशक) व स्वयं मैं युगांत बद्री पांडेय (अभिनेता)अपने अपने ख्वाबो को लेकर मुम्बई मायानगरी पहुंचते है, दोनों के रास्ते बिल्कुल अलग किन्तु मंजिल एक।
संयोग देखिए एक इंटरनॅशनल फ़िल्म फेस्टिवल गोल्डन वीट में बतौर लेखक पिंकू दुबे की फ़िल्म द लास्ट एनवलप व मेरी फिल्म बतौर अभिनेता द स्पैरो (निर्देशक अभिषेक पांडेय ) प्रतियोगिता में पहुंचती है और इस से भी बड़ा संयोग यह है कि मित्र पिंकू दुबे की फ़िल्म बेस्ट शार्ट के लिए सम्मानित की जाती है और मेरी फिल्म को बेस्ट सिनेमेटोग्राफर का सम्मान प्राप्त होता है। प्रथम बार ऐसा हुआ है कि हम दोनों मित्र एक साथ एक मंच पर मौजूद तो है ही साथ ही अपनी अपनी उपस्थिति को पुरजोर तरीके से दर्ज करा रहे है ।
मित्रो यह बहुत बड़ी उपलब्धि तो नही है। सफर अभी बहुत लंबा है किंतु जो फिलवक्त मेरी जो भावना है वो यह है कि दो मित्र जिनकी अलग अलग आंखों ने कुछ एक जैसे सपने संजोए, छोटे शहर से निकल कर अपनी पहचान के लिए शिद्दत से संघर्ष करने और कुछ कर जाने की तमन्ना से मुम्बई शहर पहुंचे थे, उनका एक बड़े मंच पर अलग अलग माध्यम से पहुंचना और छोटी ही सही मगर दोनों का उपलब्धि प्राप्त करना मुझ में एक नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। मेरे लिए तो यह एक अद्धभुत आनंद का क्षण है । मुझे पूरा विश्वास है कि यह आनंद प्रत्येक पलामू(डालटनगंज) वासियों में भी एक ऊर्जा व उत्साह का कारण बनेगा और साथ ही मुम्बई में संघर्ष कर रहे हमारे शुभचिन्तको व मित्रो को भी यह खबर आनंदित करने वाला है ।
आपका अपना
युगांत बद्री

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