Saturday, February 5, 2022

जय मां शारदा


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भोरे भोरे देखे 10 12 ठो गांव के लईकन आ गया दुरा पर हाथ मे पैड लेके ओकर में सबसे आगे गुलगुल चाचा के बेटा सिनुआ "अनु भईया चंदा देहुँ , सरसती पूजा के।"
हमहूँ अबकि ढेरे साल बाद रुके हैं घरे #सरस्वती_पूजा में। समय गुजर गया , साल बीत गया लेकिन लईकन में जे उत्साह सरस्वती पूजा के रहता था उ आज भी वही है। साल भर में लईकन के एके गो तो पूजा रहता था जिसमे घरे वालन से परमीशन लेवे के भी जरूरत ना पड़ता था।
हफ़्ता दस दिन पहिले से लईकन के बीच चर्चा चालू हो जाता। अबकि कैसा पंडाल कईसन मूर्ति लाना है। केकर से अबकि केतना चंदा लेना है। कमीटी बनता बजापते अध्यक्ष सचिव के चुनाव होता। और सबसे मेन रहता कोषाध्यक्ष के पोस्ट रहता । ई पोस्ट सबसे भरोसेमंद आदमी को ही चुना जाता था। 2 4 लईकन अध्यक्ष सचिव ना बनने से रूस भी जाता था लेकिन बाद में उसको उपाध्यक्ष और उप सचिव के पोस्ट देकर साथ मे लिया जाता था। घरे-घर जा के चंदा लेना , उम्मीद लगा के जादा के पेड काट के और कम चन्दा देने पर लईकन के बीच बड़ी गोस्सा रहता। सबसे बड़ा दिक्कत होता था टीम के मेंबर लोग के घर से कम चंदा मिलने पर दिक्कत। तब मजबूरी में घरे से माई के मना के न तो चुपे चोरी 2 4 किलो चाउर धान से मेकप करना पड़ता था माई ओ बेचारी मोह में पड़ के दे देती कि "का जन एकरो से बेटा पर सरस्वती माई किरपा बरसा दिहन तो रोडवा पर वाला प्राइवेट स्कूलवो में मस्टर तो वह जाई"।
खैर पूजा के प्रसादी खरीदने में महंगा पड़ता इसलिए गाँव मे ही बनवाना पड़ता उसके लिए पकड़ते सुरेश बाबा के उहे बनाते थे फ्री में। पंडाल में खर्चा ज्यादा नहीं करते थे। लेकिन परसादी बढिया हमेशा से रखते थे। गजरा मटर बैर के साथे बुनिया के मात्रा रहता था काम भर। अब पंडाल के लिए, हर घर से साड़ी आता , उसके बाद आम के पता और लाल पियर हरियर कागज़ के पताका ही चिपकाया जाता सुतरी डोरा में उसी से सजाते। पूजा होता आगे अध्यक्ष सचिव बैठते पीछे बाकि लईकन। अब रात में सुतने का टेंसन अलग एक तो ठंढा ऊपर से घरे से परमिशन चाहिए सो अलग।किसी तरह से रात में कम्बल लेदरा लेकर सब अपन अपन घर से चोरी चुपके पहुँचते थे। रात के मस्त विडियो प्लेयर से बड़का tv लान के उसी पर 1 -2 ठो भक्ति सिनेमा बाद में रात में उ समय का मिथुन का हिट सिनेमा चलता।अब रात भर जगने के लिए कुछु तो चाहिए न।
ईसब विधान हो के पूजा होता था। सरस्वती जी के किरपा केतना बरसा उ तो अब उहे जाने लेकिन मज़ा बहुत आता था।आज भी पूजा है लईकन के तैयारी देख के उहे सब ईयाद पड़ने लगा तो सोचे आपलोग तक भी पहुँचा दे। शायद इहे बहाने आपलोग भी अपन अपन बचपन वाला ईयाद बता दे।
©आनंद केशव
May be an image of 7 people, people standing and outdoors
विद्या जो देती... जय सरस्वती
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आज सुबह सुबह मैंने अ

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