बार-बार झुका कर स्कूटर को, पापा का किक मारना और गुस्से से बुदबुदाना। मेरा रास्ते के किनारे खड़े होकर इंतज़ार करना और प्रार्थना करना- "प्लीज् गॉड अब और नहीं सह सकता। हर आने जाने वाले देख रहे हैं। हंस रहे होंगे मुझपे। अभी गोलू भी पार होगा इधर से ही अपने पापा की कार से। देख लिया उसने तो जीना मुश्किल कर देगा क्लास में।"
समय बदला। पहले सुंदर बाइक, फिर लोन पर कार लिया। पर आज भी वो सुकून और खुशी नहीं मिली, जो पापा के स्कूटर में पीछे बैठ कर मिलती थी।

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