Monday, November 26, 2018

बाल दिवस:(खेसारी चाचा की बतकही)


"का चचा...? आज पोतवा ता पूरा गांधीजी बन के स्कूल जा रहल बाss। कौनों फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता बा का ?" मैंने यूं ही अनजाने में खेसारी चचा की दुखती रग पे हाथ रख दिया।

"का कहूं बबुआ।आजकल ई सब नवका इस्कुलियन के चोंचला बा खाली...। लईकन आज कल पढ़े जा ले कि नौटंकी खेले हमरा थाहे ना चलs ला।

एगो हमीन के जमाना रहे इस्कुलिया के नामे पे हमीन के नानी मरs हलक। एह मार गुरुजी मारs हलन की चार रोज लंगड़ा के चले ला पड़s हलक। आज कल ता मास्टर के तनी सुन डांट पड़लक नाही की बाउजी के एगो हर्ट हो जाए ला।"

"हमर बड़का अभिए अपन छौंड़ा के पुरनका इस्कूल से नाम कटा के चियांकी इस्कुल में लिखवइले बा।हम कहबो कईली कि रहे दा रे.. मार से रेंगन के देहिया बजर होखs ला। लेकिन काहे ला, आज कल के नवका छउरन सुने जास..., एहनी के ता फरफर अंग्रेज़ी बोले वाला लईकन चाही।

हमीन के टाइम में बाबू पौना, सवैया, अढ़ैया सब रट्टा मारे के पड़s हलक। आज कल ता लईकन वन जा, टू जा, थ्री जा में ही गड़बड़ा जाले।

हमीन रात में ढ़िबरी जला के अउर सतुवा खा के दिन भर पढ़े जा हली। आज कल ता बस्केटवा में अलगे से तीन बेरा के खाना ले जाले। पस्ता,मईगी आऊ चौमीन खाली इहे सब के रुचs ला।

हमीन वाला बात आज कल के रेंगन में ना रह गइल होsss... आज कल ता बाल दिवस ऐसे मनावा ले कि बचपना कहीं खो गईल बा आऊ ओकरा मिस करत बड़न सब। बच्चा ना हो गइलन , बाघ हो गईलन। दिवस मनावे के पड़त बा।

हमीन के हिम्मत रहे की बाऊजी के आगे आंख उठा देती, दीदा ना फोड़ देतन हमीन के। डैड डैड कह के कपार पे चढ़ गईलन हो सब। दू सेर दूध हमीन ऐक्के सांस में गटक जा हली। ई सब के कुछु-कुछु मिला के दे दा उहे एहन के बेस लागेला।"

खेसारी चाचा के इ सब बात सुनकर हमरा लागल कि ठीके बोलत बाड़ेन चाचा।आजकल इ सब बढ़का बढ़का ईस्कूलिया के चोंचलेबाजी बढ़ गईल बा। पढ़ाई लिखाई के त एहन धंधा बना ले लेलन।अब चाचा के अउर फिर हमनी के जमाना और अब इ नवका लइकन के जमाना केतना अंतर आ गइल बा...।

का मालूम.....?चाचा के बतकही सुनकर शायद रउआ लोग इहे बोलब कि इ बात चाचा के उम्र का तकाज़ा बा ..या बुढ़ापा के असर बा।हमरो न बुझाईल...। फिर भी उनकर दार्शनिक सोच पर कुछ देर हम सोचे ला मजबूर हो गइली।

फिर इ सब फ़िज़ूल के चक्कर में ना पड़ते हुए हम खेसारी चचा के आगे खेसारी जैसा मुंह बना कर हंसने की चेष्टा करने लगे। समझ में नहीं आया कि इनकी बातों का क्या जवाब दूं।

©Ajay Shukla
 
 

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