Monday, November 26, 2018

अंग्रेजी



केतना बार समाचार में ई सुने के मिलेला कि कोई शिक्षा पदाधिकारी विद्यार्थी से पूछ लेलन कि ABCD सुनाओ तो लईका उल्टा पूछ देलक कि कवन सुनाये सर बड़का कि छोटका? अईसन-अईसन केतने समाचार सुने के मिल जाला कि कहीं कोई महीना के नाम अंग्रेजी में गलत बता देलक तो कोई अल्फाबेट केतना होवेला से गलत बता देलक। तो भाई जी लोगन आज हम आपन जमाना में अंग्रेजी सीखे-सिखावे के आउर अंग्रेजी कइसन होत रहे ओकर वृतांत बतावत हिये।

जब हम क्लास छठा में गेल रही तs पहली दफा हमरा पता चलल कि अब अंग्रेजी सिखेला बा। मन में बड़ा ललक रहे कि हमहूँ अंग्रेजी सीखूँ आउर उ ललक एहसे रहे कि जब हम चौथा में रही, ओहिघरी गरमी के छुट्टी में हमर फुफेरा भाई जे उत्तरप्रदेश में पढ़त रहन छुट्टी मनावेला अपन नानी घर मने हमार घर आईल रहsन। उ त पढ़त रहsन एक क्लास उपरे आउर अंग्रेजी धड़ल्ले से चार लाइन में लिखत रहsन। हमरा तs..एको पल्ले पड़ते नाहीं रहे, काहे कि कबो उ चार लाइन में अक्षर के उपरे, कबो नीचे, कबो बीचे। पते नाहीं चलत रहे कि इ कइसे उपरे, नीचे आउ बीचे ले जाके लिखs हथीन।

जब ई हमार बुद्धि में नाहीं धसल तो बड़ी हिम्मत करके पूछली। हिम्मत के बात एहला बा कि हमर फूफा ओबरा, उत्तर प्रदेश में थर्मल पावर में साहेब रहsन आउर हमर फुफेरा भाई लोगन पूरा अंग्रेजी मीडियम कान्वेंट में पढ़त रहsन। एक दम से ड्रेस, टाई, बेल्ट आउर बूट जूता, इतना देखके हमरा हिम्मते नहीँ पड़त रहे। उ घरी त हम ऊ चेक वाला अंडर बियर पूरा जरबन वाला पहिन के खुद के टाइट बुझत रही आउर खुशी-खुशी बैइठेला प्लास्टिक के बोरा, आउर कपड़ा के झोला माई सीके बना देले रहे, ओर से में किताब आउर जिस्ता वाला कॉपी ले जात रही। ई चार लाइन के कॉपी का होत रहे, हमनी के भेंटे नाहीं रहे।

त जब देखली कि ई चार लाइन के कॉपी हो ला, जेकरा में कबो नीचे, कबो उपरे लिखल जा ला। त भईया से हिम्मत करके पूछली कि एहो!भईया, इ उपरे-नीचे अक्षरवा के कइसे आउर कब ले जा लs.?..हमारा तs..बुझाते नखव। त उ घरी उ डांट देलन कि तुमको नहीं बुझाएगा। आउर सच में उनकर लिखब देखके बहुत आश्चर्य भइल आउर फुफेरा भाई के ज्ञान के देखके उनकर तरफ बड़ी कातर नजर से देखत रहगेली आउर एहसे उनकर ज्ञान ला बड़ी मन में आदर भइल। मन में बड़ा व्याकुलता बनल रहल, पर मन मार के रहली। फिर जब हम छठा में पहुँचली त पता चलल कि अब हमरो अंग्रेजी पढ़ेला बा। बाउजी हेड मास्टर रहsन एहसे जल्दीये हमरा खातिर किंग रीडर किताब खरीद के ला देलsन कि हम तनी स्पेलिंग याद कर-कर के अंग्रेजी सिख जाऊँ।

आउर फिर जल्दी-जल्दी बड़का ए बी सी डी...,फिर छोटका, फिर लपटेऊआं सीखे के कोशिश करे लगली। वैसे तs लपटेऊआं ए बी सी डी.....तs अभियो बढ़िया से नाई अईलक, पर हार नइखी मनले अभियो कोशिश करत रहिला। हं इ उपरे, नीचे आउ बीचे लाइन में लिखे वाला बतवा जाके मैट्रिक में बुझाएलक। तब जा के अंग्रेजी से कुछ-कुछ डर खतम भइल।

एही बीच में एगो घटना घटल कि वार्षिक परीक्षा होत रहे, हमर आपन बड़ भाई हमरा से चार क्लास आगे रहन। अंग्रेजी परीक्षा में आपन दिमाग लगाके खूब लिखलन, पूरा पेज भर देलन। ई देखके गांव के एगो लईका हमार भईया से जिद कएलक कि हमरो कॉपी में लिख देहुँ न गउवां। भईया कहलन कि हमरा अंग्रेजी लिखे नई आवलउ, पर ओकरा विश्वास नाहीं भइल। ओकर जिद पर हमर भईया खुबे अंग्रेजी लिखलन ऊ लइकवा बड़ी खुश रहे कि अबरी अंग्रेजी में खुबे नम्बर आई, पर जब मास्टर साहब कॉपी चेक कइलन त आपन माथा पकड़ के बैठ गेलन, काहे कि जे लिखल गइल रहे ओकर कोई अर्थे नाहीं रहे। बस लेटर के कबो उपरे, नीचे आउ बीचे, जे बुझाइल, जइसे मन कएलक खूब अंग्रेज तरी लिखलन बाद में जब मास्टर साहब भिर भेद खुलल त ऊ दुनों जने के थेथर के दोहरा छड़ी से ठोकाइ भइल। जेकरा याद करके हमर भईया आजो सिहर जा लन। उ समय में ई रहे मास्टर आउर विद्यार्थी के सम्बंध। आउर आज.....RTE...😡
इ कहs कहs के पिटाई भइल रहे कि
"जब छड़ी चमके, तब बिद्या बमके।"

जय हो अंग्रेजी
खैर! अंग्रेजी से डर भगावेला बड़ी मेहनत कइली। कॉलेज में प्रो. सुभाष चंद्र मिश्रा सर से पढ़ली आउर फिर स्नातक में भी अंग्रेजी पढ़ली। फिर बाद में अशोक कुमार सिंह सर (पटना में) (लेखक-द ब्रिटिश इंग्लिश ग्रामर) से पढ़ेला सौभाग्य मिलल। आउर आज ईश्वर के कृपा से हम ओहि अंग्रेजी के मास्टर बनल हीs, स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक।

बहुत दिन तक तो पलामू के केतने लईकन तो विनय प्रकाशन के न्यू मॉडल इंग्लिस ट्रांसलेशन से ट्रांसलेशन बना-बना के अंग्रेजी सीखे के कोशिश में बचपन गुज़ार देलन पर ई ससुरी अंग्रेजी समझ मे एतना जल्दी आवो तब न। पर अब समय के साथ स्थिति बदल गईल बा, अब अंग्रेजी कौनो पहाड़ नईखे रह गेल, तबे तो इहाँ के लईकन सब भी बढ़िया-बढ़िया सरकारी नौकरी से लेके हर क्षेत्र में परचम लहरा रहल हथ।

अविस्मृत संस्मरण आप सभी को सादर समर्पित।।।


Dinesh Kumar Shukla 



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