Monday, November 26, 2018

ट्रांसफार्मर कथा


कुछ बरस पहिले की बात है। लंबे समय के बाद हमारे गांव में ट्रांसफार्मर बन गया था। अउर उस दिन सभी लोग पूजा पाठ करके चालू किया था। बहुत दिनों बाद रात में कुछ घरों में रोशनी दिखलाई पड़ी थी। भक्क-भक्क कर के जब बल्ब जल गया था तब अगला दिन भिनसारे सबके चेहरे में मुस्कुराहट दिखलाई पड़ रही थी।
का मालूम उन दिनों कहाँ से कनेक्शन था कि जब भरी दुपहरिया में या फिर रात को जब आप आधा नींद में रहते थे तब ही बल्ब जलता था लेकिन जलता था खुशी की यही बड़ी बात थी। दूर दूर में बाल बच्चों को खबर कर दिया गया कि ट्रांसफार्मर बन गया है। अब लाईट का कोई दिक्कत नहीं है।
लाईट का दु फेस था। कभी एकरा में है तो ओकरा में नहीं । इ फेस में कम बोल्टेज है ओकरा में जादे है। ई परेशानी जब शुरू हुआ तो लगभग सभी घर में हुक लगा हुआ बांस का एक डंडा रहता था और इ फेस से उ फेस में बदलने वाले पारंगत लोग भी....। तार में एगो पत्थर बांध के इ तार से उ तार में करना गाँव के लोगों के दैनिक दिनचर्या का अंग हो गया था।
अब जब लाईट आ गया तो चाहे दुपहरिया हो या आधी रात....बल्ब बस जलते रहता था।गाँव में अधिकांश घर में जलाने बुझाने का स्विच ही नहीं था। रात को सब बल्ब जला के सोता था त पूछे काहे....??तो बोला कि- "हमीन यहाँ भी बॉल बत्ती आ गया है अब अन्हरिया में नहीं सुतते हैं।" यहाँ तक कि घरे घर हीटर रखा जाता है, अगर खाना बन गया और लाईन नहीं काटा है तो सब पानी चढ़ा देता है। लाईट आने से बहुत फायदा...। एगो त अन्हरिया में सांप बीछ का खतरा कम हो गया। घर-घर में टीवी अउर मोबाईल...मतलब मनोरंजन का साधन बढ़ गया। पंखा कूलर, फ्रीज तो अब आम बात हो गया है। सबसे बड़ा सुविधा हो गया पानी पटाने में..अब सबके खेत-बाड़ी हरियर दिखने लगा।
अब लाईट है त खराबी तो आएगा ही..। इसे जलन की भावना कहिए कि सामाजिक एकता की मिसाल....एक टोला में लाईट है दूसरा में नहीं....तो गाँव के तेजस्वी युवा पक्का दूसरे टोला का भी ट्रांसफार्मर या बिजली तार में छेड़छाड़ करके खराब कर देते हैं कि हमरा घर में अन्हरिया है त फलाना टोला में बल्ब जलता देख मन में कूढ़न नहीं हो।
अउर दु चार दिन लाईट नहीं रहेगा तो उसके बाद सबके सब मालिक-मालिक बोलकर इंजीनियर को फोन करेंगे। पहिले त टूटी फूटी खड़ी बोली में अउर फिर पलमूहाँ अंदाज़ में उनके अद्भुत वार्तालाप को सुनकर आप पलामू के युवा शक्ति की विलक्षण प्रतिभा से परिचित हो जाएंगे। ट्रांसफार्मर खराब होने पर गांव के लइका लोग निकल जाएगा चंदा जुटाने... सब मिल जुल के चंदा जमा करता है अउर फिर नेता जी के पास जाता है। कभी तेल डालना है तो कभी फ्यूज उड़ गया है। इसके लिए चंदा लेने का कार्यक्रम लगातार जारी रहता है। और चंदा काटने के लिए लड़को के झुंड में एक गांव का विश्वास पात्र आदमी जरूर रहेगा और उसका काम सब घर जा के गारजीयन टाइप आदमी के पूरा प्रक्रिया समझाना रहता है। अउर जे चंदा देने में जादा आनाकानी करता है त समझ लीजिए कि उसको रात बिरात अंधेरे में ही रहना पड़ेगा कि कब कौन तार गिरा दिया पता नहीं चलता। यहाँ तक कि गांव पंचायत के नया-नया नेता से उद्घाटन करवाने के नाम पर विशेष अनुदान भी लिया जाता है। कई बार अगर जल्दी-जल्दी ट्रांसफार्मर उड़ने लगे तो विशेष पूजा- पाठ के बाद ही स्टार्ट किया जाता है।
अब ऐसे समय में मान लीजिए कोई शहर से गाँव गया है और उसका पूरा विश्वास दिलाया गया है कि गाँव में बिजली आ गई है,अब कोई परेशानी नहीं...और जिस दिन वह वहाँ पहुँचे उसी दिन ट्रांसफर्मर खराब हो जाता है। लेकिन दु चार दिन बाद जब उसके वापस जाने का समय होता था तब लाईट आ भी जाता था।उस समय लगता था कि वह मुंँह चिढ़ाने के लिए आया है।
एक बार तो हम बड़का स्टैबलाईजर खरीद कर लाए कि अब वोल्टेज सही रहेगा और लाइट ही गायब...अउर ई त पलामू के पुरान रिवाज है कि जहिया पंखा,फ्रीज, कूलर कीनाया नहीं की...बी मोड़ से लाइन कटल है... 4 रोज ला.... त हफ्ता रोज़ ला। थोडा हवा बयार चला त समझ लीजिए कि दु चार दिन के फुरसत।
का है कि हमरा घर के पास ही ट्रांसफार्मर है। वहाँ त मचहला जमा रहता है। एक से बड़े एक कारीगर है गाँव के युवा लोग.... उनके सामने बिजली इंजीनियर हो या बिजली मिस्त्री,सब के फेल...। दु चार गो का डाइरेक्ट कांटेक्ट होता है बिजली विभाग से... लाईट कनेक्शन कटवाने में एक्सपर्ट..। सब बंदर जइसा खम्भा पर अइसे चढ़ जाता है कि खुद के नन टैलेंटेड होने का पक्का यकीन हो जाता है।
मान लीजिए कभी ट्रांसफार्मर खराब हो गया तो गाँव के बड़-बुजुर्ग सबसे ज्यादा गाली सुनाएंगे तो गाँव के युवा नेताओं को....कि काहे के नेता बनते हो जी। सब परिवार आया है।अउर यहाँ लाईटे नहीं है हमरा समय में जब ट्रांसफार्मर खराब हुआ था त नमधारिया को सिर्फ एके बार जा कर बोले थे। जइसने हमको देखा... खड़ा हो गया था.... बोला कि बाबा रउआ बोल दिहली त राउर घर पहुँचे के पहिले ट्रांसफार्मर लग जाइ अउर सांझ के बाजार कर के आए त देखें कि पूरा गाँव जगमगा रहा है।
वैसे तो पलामू की ट्रांसफार्मर कथा या व्यथा पर बड़ा रिसर्च किया जा सकता है।लगभग सभी पलामूवासियों का इसपर लंबा अनुभव रहा है।उम्मीद है इस पोस्ट पर आप भी अपने अनुभव को कमेंट के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे और पलामू की ट्रांसफॉर्मर कथा को पूर्ण करेंगे।
©Ajay Shukla

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