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बात उन दिनों की है, जब हम नया-नया होश संभाले थे। चुंकि हमलोग मोबाइल के पहले वाले किड्स हैं, तो हमारी दोस्ती आस-पास के दर्जनों बच्चों से थी। बच्चों में जन्माष्टमी को लेकर एक अलग हटके क्रेज रहता था। ये एकमात्र पर्व था, जिसमें लड़के भी उपवास रखते थे और उनका कोई मजाक नहीं बनाता था। दुसरों की ललकारी में हमने भी कई बार उपवास रखा था, जो कि बहुत ही गन्दा एक्सपेरिएंस था दिनभर भूखे रहने वाला। किसी और दिन इसपे अलग से एक आर्टिकल लिखेंगे।
सुबह से ही माँ लगी रहती थी, अपनी बगलगीर #गोई के साथ जन्माष्टमी के तैयारी में। आज जिक्र पूड़ी-सब्जी के अलावा कुछ अलग अलग दिखने वाले पकवान का जो उस समय जन्माष्टमी के दिन जरूर से बनते थे हमारे पलामू में:
1. #तिक्खुर_का_हलवा : ई सबसे इम्पोर्टेन्ट आइटम था। जन्माष्टमी का नाम लीजिये किसी पलमुवा के सामने और उसके मुँह में तिक्खुर का स्वाद तैरने लगेगा। आज की तारीख में बनने वाला कस्टर्ड जैसा कुछ कुछ कह सकते हैं। तिक्खुर(कहते थे कि खेक्सा का जड़ होता है) को सात पानी से धो कर, रात भर भीगो कर, बहुत ज्यादा दूध में उबाल कर खीर जइसा प्रोसेस से बनाते थे, माने की 50 ग्राम तिक्खुर पर ढाई लीटर दूध घांटना होता था। इसी से पलमुवा कहावत भी निकला था "तिक्खुर घोंटत हें का रे?", अर्थात "एतना देर काहे लग रहा है?"
2. #सिंघाड़ा_के_आटे_का_हलवा: नार्मल आटा के हलवा जैसा घी में भूंज के बनाते थे।
3. #पंजरी- खड़ा धनिया को भून कर और उसमें चीनी मिला कर बनाते थे।
4. #हरदी- हल्दी को घी में भूंज के और उसमें गुड़ डाल के बनाते थे। लरकोरी लोग को बहुत खिलाया जाता है, आपलोग जरूर देखे होंगे।
इन सबके अलावा भी बहुत कुछ जरूरी था जन्माष्टमी के पूजा थाल के लिए, जैसे माखन और मिश्री (भगवान को भोग लगाने के लिए), फल में केला बहुत जरूरी था अगरबत्ती खोंसने के लिए और खीरा लड्डू गोपाल के जन्म के लिए।
जन्माष्टमी पर्व हमारे पलमुवा संस्कृति का अभिन्न अंग थी, बहुत गर्मजोशी से मनाते थे हमलोग। हर पर्व की तरह इसको मनाने का भी एक अलग अंदाज था। कुछ परंपराएं थी, जिसे बनने में सैकड़ो साल लगे थे और आज की पीढ़ी ने कुछ साल में ही सब भुला दिया। गार्जियन अपने बच्चे को कृष्णा का ड्रेस पहना कर और स्टेटस अपडेट मार कर जन्माष्टमी मना लेते हैं और आज की 10 मिनट में खाना बना लेने वाली माताओं से ढेरों पकवान बनाने की आशा करना ही बेकार है।
कृष्ण-झूला से रिलेटेड बातें जान बूझ कर छोड़ रहा हूँ। उम्मीद है आप अपने घर में बने झूले की तस्वीर और अनुभव कमेंट बॉक्स में जरूर से शेयर करेंगे।
© सन्नी शुक्ला

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