Sunday, July 3, 2022

#अदरा

 #ठेठ_पलामू-

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अविभाजित बिहार की गौरवशाली कृषि परंपरा का एक महत्वपूर्ण उत्सव है- 'अदरा'। हो सकता है कि नयी पीढ़ी के बहुत लोगों के लिए अदरा एक नया शब्द हो, लेकिन पुरानी पीढ़ी के लोग इस शब्द से भली-भांति परिचित हैं। इस लोकपर्व को मनाने के पीछे बहुत सारी सांस्कृतिक मान्यताएं जुड़ी हुयी हैं और जनमानस के लिए यह परंपरागत महत्व का पर्व है, जिसे हम सैकड़ों साल से मनाते रहे हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सत्ताइस नक्षत्रों में 'आद्रा' नक्षत्र भी सम्मिलित है। शाब्दिक अर्थ की दृष्टि से आद्र का अर्थ 'नमी' होता है। ज्येष्ठ महीने में भीषण गर्मी के बाद सूर्य के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करते ही मानसून का आगमन होता है। कृषक संस्कृति में मानसून का विशेष महत्व है। जब तपती हुयी जमीन की प्यास बुझती है, तो धरती माँ,अपने बच्चों के पालन-पोषण और जीवन के लिए अपने गर्भ से अन्न उत्पन्न करने के लिए कमर कस के तैयार हो जाती है।उसके कृषक पुत्रों के लिए यह महोत्सव का समय होता है।
भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान उसकी उत्सवधर्मिता है। सुख हो या दुख हो, हम उसे उत्सव के रुप में मनाकर अपने जीवन को सहज बनाने में विश्वास रखते हैं। हमारे यहाँ 'अदरा' में दलपूड़ी, खीर, आम, जामुन, मिठाई आदि खाने की परंपरा रही है। आम के साथ जामुन का सामंजस्य या दलपूड़ी या चटकदार सब्जी के साथ मिठाई खाने का न सिर्फ वैज्ञानिक महत्व है, बल्कि यह हमारी साझा संस्कृति को प्रदर्शित करता है। 'अदरा' में खीर बनाने की परंपरा एक पौराणिक कथा से जुड़ी हुई है। एक गरीब धार्मिक महिला थी, उसे 'आदर' नाम का एक पुत्र था, जिसका जन्म आद्रा नक्षत्र में हुआ था। एक बार इसी समय वह खीर खाने की हठ कर रहा था, जबकि उसके घर मे कोई बर्तन नहीं था और भारी बरसात के कारण मिट्टी की हाँडी सूख नहीं पा रही थी। उसकी माँ बैठ कर रोने लगी और ईश्वर को याद करने लगी, तभी उसके सामने एक बड़ा सा घोंघा आया और अपना शरीर त्याग दिया। उस पात्र में आदर की माँ ने खीर बनाया और भगवान को भोग लगाने के बाद अपने पुत्र को खिलाया। इस तरह अदरा माँ-बेटे के प्रेम का भी प्रतीक है। तभी से 'अदरा' में हर माँ अपने बच्चों के लिए खीर बनाती है।
हमारे पूर्वज इस विश्वास के साथ इस त्योहार को खुशी के साथ मनाते होंगे कि अब भीषण गर्मी रुपी दुख का समय समाप्त हो गया। मानसून के प्रवेश के साथ ही वह नयी आशा और नये विश्वास के साथ अपने श्रम से जीवन को एक नया आयाम देने में जुट (तैयार होते) जाते थे।
इस लोकपर्व के संबंध में आपके पास भी बहुत सारी जानकारी होगी।दलपूड़ी, खीर, रसीले आम, मिष्ठान्न आदि के साथ आपलोगों ने भी 'अदरा' मनाया होगा या मनाने वाले होंगे। इस गौरवशाली परंपरा के विषय में कुछ नया बताएंगे, तो हम सभी को बहुत आनंद आएगा। तो इस संबंध में आपकी जानकारी रुपी बहुमूल्य कमेंट का हम बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं.......
©अजय शुक्ल
May be an image of text that says "अदरा ©अजय शुक्ला ठेठ पलामू"

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