Saturday, July 23, 2022

 #पलामू_के_मक्के_की_रोटी

पलामू के स्वादिष्ट व्यंजनों की लंबी श्रृंखला है।यहाँ की मिट्टी में प्रकृतिप्रदत्त कुछ खास गुण है।जिससे यहाँ पर उत्पन्न सामान्य अनाज से असामान्य व्यंजन तैयार होना यहाँ की खासियत है।
आज लिट्टी-चोखा,घुसका,पुआ,केरा जैसे व्यंजन सिर्फ क्षेत्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो चुके हैं।फिलहाल हम मक्के के बारे में आपकी स्मृतियों के साथ अपनी स्मृतियों को ताजा करेंगे।मक्का,मकई,भुट्टा...ढ़ेरों नाम है इस मोटे अनाज की....।सही मायनों में कहा जाए तो यह मोटा अनाज सिर्फ अपने बेमिसाल स्वाद के कारण ही नहीं बल्कि अपने पौष्टिक गुणों के कारण भी बहुत लोकप्रिय है।हमारे गांव 'सिंगरा' में मक्के की बंपर पैदावार होती है।किसी ने कहा भी था कि सिंगरा 'घाठा और माठा के लिए' पूरे पलामू में जानी पहचानी जगह है।
यूँ तो मक्के से देशी से लेकर विदेशी नाम वाले बहुत सारे व्यंजन बनाये जाते हैं।परंपरागत रुप से पलामू के अधिकांश घरों में भी दो-तीन व्यंजन बहुत खास है।उसमें 'मकई की रोटी' खास है।हमारे यहाँ साल में दो बार मक्के की फसल तैयार होती है।दो प्रकार की 'मकई की रोटियां' भी प्रसिद्ध है।एक तो पौधे से तुरंत तोड़ी हुई दुधिया मकई की रोटी...जिस नर्म ताजे मक्के के दाने में दूध जैसी नमी,मिठास और स्वाद हो,उसे दुधिया मकई कहते है।इस 'दुधिया मकई' के दानों को निखोरकर(निकालकर),भीगे हुए चावल को मिलाकर उसे सिलबट/मिक्सी में पीसकर हल्का पेस्ट बनाकर उसे तवे में फैलाकर स्वादिष्ट रोटी तैयार किया जाता है।जिसे पलामूवासी दही,मट्ठा,गुड़ या फिर सब्जी और चटनी के साथ चाव से खाते हैं।
दूसरे प्रकार की मक्के की रोटी सूखे हुए मक्कों के दाने से बनायी जाती है।मक्के को सुखाकर उसके सूखे हुए सुनहरे दाने को पीसकर उसके आटे की रोटी में जीरा,अजवाइन,मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाकर थोड़ा गाढ़ा गूंथा जाता है।जिससे मोटे लेयर की सोंधी सुगंध वाली स्वादिष्ट रोटी बनायी जाती है।पंजाब-हरियाणा में इस प्रकार के 'मक्के की रोटी और सरसो के साग' की ब्रांडिंग देश ही नहीं विदेशों में प्रसिद्ध हो चुकी है।
सही मायनों में विश्लेषण किया जाए तो पलामू के मक्कों का स्वाद अन्य जगह की अपेक्षा कुछ खास है।अन्य राज्यों की अपेक्षा हम अपने देशी व्यंजनों की ब्राडिंग और मार्केटिंग में भले ही थोड़े पीछे हों लेकिन पलामू की नयी पीढ़ी अब अपने परंपरागत व्यंजनों को राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है।
सही कहा जाए तो यहाँ के कृषक बहुत स्वाभिमानी हैं।प्रत्येक वर्ष प्राकृतिक प्रकोप को झेलते हुए और बहुत कम संसाधनों में भी अपने अथक परिश्रम और अटूट जीवनशक्ति से मिट्टी से सोना उगाने का काम करते रहे हैं।राजनैतिक अस्थिरता और असंतुलन की वजह से अन्य राज्यों की अपेक्षा यहाँ फर कृषक/मजदूरों को वह पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं,जिसके वह हकदार है।फिर भी अपने अद्भुत परिश्रम और जागरूकता की वजह से वह अनेकों अनाज उत्पन्न करते रहे हैं।घर की गृहणियाँ उस अनाज में स्वाद भरती हैं।कहा भी गया है कि "परिश्रम का फल ज्यादा मीठा होता है।" यही कारण है कि पलामू के मक्के की रोटी का स्वाद सबसे मीठा होता है। आपने भी इस मक्के की रोटी को चखा होगा,मन भरकर खाया होगा।अपनी स्मृतियों को और नयी जानकारी को कमेंटबॉक्स पर शेयर करेंगे तो हमें बहुत अच्छा लगेगा।
©अजय शुक्ल
May be an image of text that says "wब ਠੇਠ पलामू मक्के की रोटी C. अजय शुक्ला"

No comments:

Post a Comment