Thursday, November 4, 2021

#दीवाली के #मुरहा #आलूबम #पटाखा

 #दीवाली के #मुरहा #आलूबम #पटाखा

#diwali2021 

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दीवाली हो और पटाखा न हो, अइसा कइसे हो सकता है। तो आज आपको सुनाते हैं बाबा के घरी के पटाखा के कहानी। पहिले तो मुर्गा छाप के ही दबदबा कायम रहा ढेरे टाईम तक।
लेकिन अब धोनी, कोहली, करीना, कटरीना,स सलमान सब मार्केट में थोक के भाव बिक रहा है। बस पउकिट में काम भर रुपिया होना चाहिए। तो अभी के जमाना से तनी पीछे चलते हैं और आपन समय मे घुंसते हैं। लेकिन ओकरो से पहिले एगो कहानी जे बाबा बराबर सुनाते हैं, उ बताते हैं आपको।

बाबा से जब बम पड़ाका के बात निकलता था न, तो एगो कहानी हमेशा सुनाते थे। ओ घरी आज तरी सतरँगिया और रॉकेट तो था नहीं। उस समय के फ़ेमस आईटम था #मुरहा। मुरहा के खासियत ई था कि ई बम तो था लेकिन फूटता नहीं था। खाली सुरसुराता था और छोड़ने के बाद एने-ओने खुबे भागता था। 10 गो मुरहा में दुईये-चार गो ठीक निकलता था। बाकी सब तो फुसफुसा के आपन जगहे पर टाँय-टाँय फीस कर देता था। मुरहा लमलोल रहता था, एक देने से मोट, एक देने से पातर। पातर देने से जरावे पे , हर-हरा कर के भागे लगता था। मुरहा जलावे वलन में भी अलगे उमंग रहता था कि केकर उड़ेगा आउ केकर फड़फड़ा के दरे पे रह जायेगा। अइसही बाबा लोग भी सब ख़रीद के लाये थे मुरहा 1 आना में 5 गो आउ छोड़ना शुरू किए। लगातार 3, 4 गो छोड़े, सब वहीं मुर्गा जईसन फड़फड़ा के रह गया एके जगहिया पे। आसपास के लईकन मज़ाक़ भी उड़ाया कि ठगा गइले। ई सब से तनी दूर एगो बुढऊ बाबा बईठल थे दती पर, आपन में मगन। तब हमर बाबा जलाए एगो मुरहा और उ ससुरा लहरते मिर्गी उपटल जईसन एने होने उड़ियाये लगा, आउ जाके घुस गया अलगे बईठल बुढऊ बाबा के धोती में। फिर का था, नयका धोती के कल्याण हुआ आउ का। न जाने उ बेरा में केतना के धान के पूरा के गांज में आग लगा है, केतना गरीब के फूस के झोंपड़ी में आग लाग गइल ई मुरहा के चक्कर मे।

अब हमीन के टाईम में एगो बम था- 'आलू बम', जेकरा सही मायने में पटाखा कहल जाता था। पटके से फाटत रहे सेही ला। एकदम रंगीन कागज में लपेटल गोल-गोल बम, छोट ढेका नियन साइज़। इहो आधा से ज्यादा फुटबे नहीं करता था। टीवी में सिनेमा में दिखाता था कि सब बम मुँह से चुम्मा ले के फूंक के पटकता है, आउ गढ़ाम से फटता है। फिलिम में भले कांटी निकाले ला करता हो, पर हमीन आलू बम के फूँक-फूँक के गरम् करते थे आउ तब अईसन हाव भाव के साथ दीवाल पे फेंकते न जइसे सामने वाला दीवाल के धज्जी उड़ा देवेगा। एकर बाद तो न जाने केतना रकम के बम आया गया, लेकिन उ आनंद नहीं मिला फिर।

बम-पड़ाका छोड़िये मन लगा के छोड़िये। लेकिन थोड़ा बच के, बचा के, दीवाली के ढेरे मानी शुभकामना। आउ कुछु आप लोगन के किस्सा कहानी होइ तs कमेंट बॉक्स में डालिये। हमिनियों तनिक नॉस्टैल्ज़िक हो जायें।

© आनंद केशव 'देहाती'

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