लोकपर्व की श्रृंखला में मकर संक्रांति का त्यौहार मुझे बहुत पसंद है। यह हमारी भारतीय कृषि संस्कृति के बड़े लोकपर्वों में एक है, जब नए फसल आने के उल्लास में भारत के अलग-अलग क्षेत्र में इसी दिन के आसपास लोहड़ी, पोंगल, छेरता, बीहू आदि विभिन्न नाम से यह खुशियों का पर्व मनाया जाता है।
आज मकर संक्रांति लोकपर्व से जुड़ी मान्यताएं, खान-पान आदि भी कई वैज्ञानिक आधार पर खरी उतरती है। आज से #खरवास खत्म हो जाएगा और अब शुभ मांगलिक कार्य होने शुरू हो जायेंगे। सूरज आज दक्षिण से #उत्तरायन हो जाएगा। आज के बाद ठंड की उल्टी गिनती शुरु हो जाएगी। कल से सूर्य की उष्मा बढ़ती चली जाएगी। बसंत की सीढ़ियों पर सवार होकर धीरे-धीरे, फिर बेचैन करने वाली गर्मी आएगी।
छोड़िए! ठंड-गर्मी की चिंता फिर कभी करेंगे। फिलहाल आज के त्यौहार का आनंद लें। सुबह-सुबह कड़कड़ाती ठंड में जल्दी उठकर नहाने का कष्टमय आनंद, चावल-दाल और तिल का दान करने का आनंद, #दही_चूड़ा और फिर घर में बने हुए तिल, मुरहा, चावल और चूड़ा के विभिन्न प्रकार के लड्डू और #तिलकुट से मुँह मीठा करने का असीम आनंद...और आज की पतंगबाजी की बात ही निराली है।
और हाँ, आज बनने वाली #खिचड़ी के स्वाद की तो बात ही अलग है। पापड़,अचार और अदरक-धनियापत्ती की चटनी के साथ नए आलू, मटर, फूलगोभी, चावल, दाल आदि से बनने वाली लज्जतदार खिचड़ी से भला किसका जी न ललचाएं ।फिलहाल,आप सभी भी तिलकुट और लड्डू खाए,स्वादिष्ट खिचड़ी खाएं और इस कृषक संस्कृति के महापर्व का जी भरकर लुत्फ उठाएं।
आप सभी को मकर संक्राति की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।
©अजय शुक्ला

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