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हे पलामूवासियों! कभी किसी प्रवासी पलामू वासी (यानी सालों से बाहर रहने वाले लोग जो बहुत दिन के बाद हफ्ते भर की छुट्टी लेकर वापस इस धरती पर आए हैं) के साथ बस 15 मिनट बिताइए। आपको पलामू को देखने का एकदम नया नज़रिया मिल जाएगा।
अब बिना एन्ने-ओन्ने किये सीधे काम के बात करते हैं। हमारे प्रवासी भाई जी का पिछले हफ्ते आगमन हुआ। और तब से मेरा अधिकतर समय उनके #nostalgia वाले पागलपन की संतुष्टि में ही पार हो रहा है। किसी भी झाड़-झंखाड़ को अद्भुत प्रकृति का उपहार बनाने और यहाँ की मिट्टी को चवनप्राश समझने के बाद, हमारे भ्राताश्री की नज़र रास्ते में 'रंगबाज़/कपरफुट्टा का इलाज' वाले बोर्ड पर पड़ी। अब लग गए इस अजीबो-गरीब सी बीमारी औेर उसका इलाज करने वाले तथाकथित डागडर साहेब की खुफिया तफ्तीश में। छोटा भाई होने के कारण मुझे ही नकली मरीज़ बनने का सम्मान मिला। और प्रवासी भाई साहब तन्मयता से पूरे वार्तालाप को खुफिया कैमरा से रिकॉर्ड किए जा रहे थे और खुद को शेरलॉक होम्स से जरको कम नहीं बुझ रहे थे।
अब आपलोग डागडर साहेब और हमारी वार्तालाप पे एक नज़र डालिये-
हम: "डॉक्टर साहब दिमाग सनसना रहा है, एकबैगे उड़े लगता है, बहुत बथ रहा है।"
डागडर साहेब: "रंगबाजे हईये है" हम: "चश्मा बनवाये तबो बेस नहीं बुझा रहा है।"
डॉ: रंगबाज़ है, दवाई बनाना होगा...
फिर माथा छू के बोला कि-
"गाढ़ा(गढ्ढा) हो गइल है माथा में.. पहिले रेंगण के होता था, अब बड़ा लोग में भी होए लगा है.. दवाई बना दे रहे हैं, एक हज़ार लगेगा।"
हम: "पैसा नहीं है ओतना जी।"
डॉ:" पांचो सौ के बना देंगे।"
हम:" ओतनो नई है।"
डॉ: "अच्छा बाद में बनवा लीजियेगा, 20 के तेल ले लीजिए ना, तब तक बढ़े नहीं देवेगा.. दिमाग मे कीड़ा होता है.. खात-खात गाढ़ा कर देता है।"
इस खूबसूरत मोल मोलाई के बीच मेरी नज़र मेरे भ्राता श्री पर गई जो खुफिया वीडियो को अपने न्यूरो फिजीशियन मित्र के साथ शेयर करके अपनी ज्ञान की भूख मिटा रहे थे और हम इधर लुटा रहे थे।
लौटते समय भ्राता श्री के चेहरे को देख कर मुझे अंदाज़ा लग रहा था कि नोस्टाल्जिया का भूत कुछ हद्द तक उतर चुका है।
खैर! ये रंगबाज/कपरफूटा नाम की हैरतअंगेज करने वाली नयी बीमारी जो कि सिर्फ पलामू में पायी जाती है, उसके बारे में गूगल भी कुछ नहीं बोल पाया।
मगर अपनी सामाजिक सरोकार और जिम्मेदारी को समझते हुए ठेठ पलामू की टीम जल्दी ही इस रोग के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट आपके समक्ष प्रस्तुत करने वाली है जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों की राय भी रहेगी। तब तक आपलोग इस बीमारी के बारे में जो भी सवाल जवाब रखना चाहते हैं कृपया कर के कमेन्ट में डालें ताकि हम विशेषज्ञों से इस बारे में बात कर सकें। अभी जाते हैं भ्राता श्री को खजूर का रस पिलाने Nostalgia शान्त करने के लिए...
©सन्नी शुक्ला
Disclaimer: हमारा उद्देश्य किसी भी व्यक्ति की आस्था या विश्वास को ठेस पहुंचाना नहीं है। यह आलेख विशुद्ध मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है। चित्र घटना और पात्र:काल्पनिक।

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