Thursday, August 9, 2018

हैदरनगर का भूत मेला


भूत लग गया है कौनो देवास ओझा से ठीक नही हो रहा है। झरवा-फूंकवा के थक गये हैं। तो चले जाइए हैदरनगर के भूत मेला में, ओझा-गुणी के चक्रव्यूह में फसकर नाचते गाते भूतों के दर्शन हो जाएंगे।
आज तक ऐसा कोई भूत पैदा नही हुआ जिसका उपाय यहाँ न हो। आप माने या न माने पर लोगों का तो यही मानना है। और ये लोग सिर्फ झारखण्ड- बिहार के नही बल्कि देश के कोने-कोने के है।

भगवती की मंदिर में 1833 से यह पौराणिक मेला लग रहा हैं।  जहाँ हर कोने से वो लोग आते हैं जिनको भूत धर लेता है। यहाँ शक्ति पीठ है जिसकी पूजा की जाती है। प्रसाद के रूप में यहाँ चढ़ने वाला पंचरंगी मिठाई भी स्पेशल है। जिसको भी भूत लगा हो वो पहले देवी जी की पूजा करता है। और उसके बाद आँगन में बने हवन कुंड के पास उसके भूत को दरसाया (नचवाया) जाता है। ओइन्छ-पोइन्छ के जब जब भूत निकल जाए तो वही मंदिर के बाहर पीपल के पेड़ में एक कील ठोक दिया जाता है,  जो इस बात को आश्वस्त करता है कि भूत निकल गया है और अब सदा-सदा के लिये पेड़ में कील के साथ ठोक दिया गया।

यहाँ भूत-प्रेत से परेशान लोगों के साथ-साथ ओझा-गुणी भी आते हैं। जो यहाँ आकर साधना के माध्यम से अपनी तंत्र विद्या को सिद्ध करते है, और कितनो का मानना है कि वो लोग जितना लोग का झाड़ फूंक करते है साल भर उ सब भूत को यहाँ आकर छोड़ देते हैं कि फिर से वो किसी को तंग न करे।

पुजारी ज़ी का कहना है की यहाँ माता के दरबार में एक बाघ रोज शाम आता था और सुबह चल जाता परन्तु कुछ लोगों द्वारा उसे परेशान किया गया जिसके बाद उसका आना बंद हो गया।

अभी तक आप सुने होंगे, सिनेमा में देखे होंगे भूत होता है। पर यह कितना सच है कितना झूठ है इसपे बहस विज्ञान और अध्यात्म में होता रहा है, और पता नही कब तक चलता रहेगा। पर हम इस लेख के माध्यम से बस उस स्थान और उससे जुड़ी लोगों की आस्था से अवगत कराना चाहते हैं।

© Sunny Shukla

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