Wednesday, December 30, 2020

ठेठ पलामू : पलामू किला मेला



इस पौराणिक कहावत को याद दिलाता है #ऐतिहासिक_मेला जो पलामू किला में लगता है. खूबसूरत #ओरंगा नदी और बेतला जंगल की शानदार खूबसूरती के बीच शानदार मेला. लाखों लोग खींचे चले जाते हैं हर साल. यह चेरों वंशों का एकलौता मेला है, दूर रहने वाले चेरो भी मेला में जरूर आते हैं.
पिछले साल कम से कम 5 करोड़ की खरीद बिक्री इस मेला में हुई थी और एक लाख से ज्यादा लोग आए थे, यहाँ की #कचरी(पेहटा) कुछ ज्यादा ही फेमस है बहुत से लोग विशेष रूप से इसे ही लेने जाते हैं, साथ ही साथ #लखठो, #गटौरी यहाँ का ताज़ा पकौड़ी तो जान है यहाँ की। लोहे के पारम्परिक हथियारों (भाला, गड़ासा, टांगी ) के साथ-साथ किसानों के खेती के सामान कोड़ी, कुदाली, हर -फार की खरीद बिक्री के लिए भी यह मेला जाना जाता है। लेकिन कहीं न कहीं हम सब ठगे हुए महसूस करते हैं जब #तलवारों और हथियारों के जगह प्लास्टिक के पिस्टल देखते हैं मेले में और पकौड़ों के महक के जगह कुरकुरे लटके मिलते हैं।
लाल दीवारों को तो गुटखा ने और लाल कर ही दिया है बीचोंबीच में 'पिंकी लव्स पप्पू' के तीर दिल को चीरते हैं। ना वहां तक पहुंचने का रास्ता बन पाया है न मोबाइल का नेटवर्क।
नक्सली हिंसा में कमी शायद अब लोगों को जाने का न्योता मिले. अब तो सड़क भी अच्छी बन गई है, साफ सफाई भी पहले से ज्यादा है, कसम से किसी भी जंगल से ज्यादा #खूबसूरत है हमारा पलामू किला से दिखने वाला जंगल.
तो आइये #सेल्फी लीजिये किला से आउ इम्प्रेशन मारिये अपनी वाली पे.
इन ढहती विरासत और दीवारों को बचाएँ इसी बहाने.

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