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Friday, November 25, 2022

माटी का चूल्हा और आलू-पराठा

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जब कड़ाके की ठंड पड़ रही हो और माँ माटी के चूल्हे पर खाना पका रही हो तो मुंह से यही शब्द निकलते हैं- "गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त/ हमी अस्तो, हमी अस्तो, हमी अस्त" (धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यही हैं)। फिर अगर तवे पे आलू-पराठा सींक रही हो, तो फिर नवाबों वाली फीलिंग्स आने लगती है।
जी हाँ, बात आजकल की ही हो रही है, जाड़े के दिनों की। इन दिनों अक्सर बाजार मे नए आलू और पुराने आलू के बीच श्रेष्टता का जंग छिड़ी होती है और इस जंग के बीच में फैसला कीमतों से तय होता है और फैसला हो जाता है, जो आलू सस्ता है, वही अच्छा है। खैर नया हो या पुराना, आलू तो आलू है, स्वाद में बेमिसाल।
आलू की बात इसलिए भी क्योंकि जाड़े के दिनों मे अक़्सर ही आलू-पराठा घर में बनता है। जाड़े के दिनों में जब खाना बनाने में ठंड लगे तो मिट्टी का चूल्हा याद आता है और फिर कहीं से लकड़ी का जुगाड़ तो हो ही जाता है। रोटी के साथ-साथ हाथ पैर सेंकने के लालच मे महिलाएं मिट्टी के चूल्हे की तरफ ज्यादा आकर्षित होती हैं।
अब सिलसिला शुरू होता है, आलू-पराठा बनाने का। मिट्टी के चूल्हे पर बने पराठे और #टमाटर की खट्टी-मीठी चटनी की तुलना अगर गैस और इंडक्शन पे बनाये गये पकवानों से करें, तो ये कलयुग का घोर पाप होगा। आलू पराठा के साथ अगर #लहसून और #धनिया की चटनी मिल जाए, तो अहाहा फिर क्या बात है। मतलब स्वाद ही अलग होता है, शब्दों में बयां करना असंभव है। चूल्हे मे जलती आग को देख कर हाथ सेंकने के बहाने ही घर के बच्चे भी काम मे हाथ बटाने लग जाते हैं। चूल्हे से कुछ दूर पे अपनी #अंगिठी के साथ बैठी दादी भी अपनी कहानियां सुनाती रहती है और इस तरह हंसते हुए गप्पे लड़ाते पराठा भी तैयार हो जाता है और जब #गरमा_गरम रोटी थाली में मिलती है, तो खुद को रोक पाना मुश्किल हो जाता है। फिर क्या पराठा के साथ-साथ हाथ, मुह, पेट सब गरम, खैर इसका ही तो स्वाद है। #दुअछिआ चूल्हा हो तो साथ में आलू गोभी की #रसदार (झोर) तरकारी बनने मे भी देर नहीं लगती और पानी भी तो गर्म करना होता है पीने के लिए, पलामू के ठंड मे कनकना पानी कौन पीता है भाई।
तो जाइए और मिट्टी के चूल्हा में आलू भरल रोटी बनाइए और अलौलिक सुख का आनंद लीजिए। और अगर मिट्टी का चूल्हा ना मिले, तो पहले चूल्हा बनवाइए लेकिन चूकिए नहीं इस बार।
आप लोगों ललचाने के लिए फोटो भी एड कर दिए हैं।
© बालेन्दु शेखर
May be an image of food

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